Print Friendly, PDF & Email

चंबल। पहले चंबल घाटी के बीहड़ों में 2800 किलोमीटर से अधिक साइकिल यात्रा कर आजादी आंदोलन के नायकों की कुंडली खंगाल चुके भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन के जानकार और दस्तावेजी फिल्म निर्माता शाह आलम ने अभी हाल में चंबल संग्रहालय की ऐतिहासिक शुरुआत की है। इसमें 17वीं शताब्दी से लेकर के अब तक के ढेर सारे दुर्लभ ऐतिहासिक दस्तावेज शोधार्थियों को मुहैया कराए जा रहे हैं। लोग इन दस्तावेजों के माध्यम से यहां की ऐतिहासिकता से वाकिफ हो रहे हैं। आजादी के आंदोलन में ‘मातृवेदी’ नाम का चंबल में एक ऐसा दल था, जिसके करीब 15,000 सैनिक थे। 2016 में इसका शताब्दी वर्ष मना कर चर्चा में रह चुके शाह आलम ने चंबल की 2,800 किलोमीटर की दुर्गम यात्रा के बाद पांच नदियों के संगम तट पर ऐतिहासिक ‘चंबल जनसंसद’ के बाद ‘चंबल संग्रहालय’ की नींव रखी। इसका विधिवत उद्घाटन महान क्रांतिकारी पत्रकार कर्मवीर सुंदरलाल के जन्मदिवस पर हुआ था।

चंबल की वादियां हमेशा डकैतों के लिए क्यों बदनाम हो? चंबल के सांस्कृतिक तेवर को लेकर शाह आलम ‘के. आसिफ चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ के द्वितीय संस्करण की तैयारियों में जी जान से जुटे हुए हैं। चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल आगामी 24 से 26 नवंबर को उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में संपन्न होगा। यह जनपद मशहूर बॉलीवुड फिल्म-निर्माता निर्देशक के. आसिफ का गृह जनपद है। वही के. आसिफ जिनकी लगन और जुनून की बदौलत ‘मुगल-ए-आज़म’ जैसा शाहकार हिंदी सिनेमा में संभव हुआ। अपने ही जन्मस्थान में भुला दिये गये के. आसिफ को याद करने की सार्थक कोशिश है। तीन दिवसीय इन्टरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, जिसमें फ़िल्म कला को समेटते विविध आयोजन किए जाएंगे। इस दौरान इटावा में सिनेमा, साहित्‍य, कला और राजनीति जगत के दिग्गजों का जमावड़ा होगा। जिसमें चंबल के सुलगते सवालों से मुठभेड़ होगी। इस दौरान वाइल्ड फोटोग्राफर राजीव तोमर और वरिष्ठ पत्रकार ज्योति लवनियां की कैद की हुई तस्वीरों की प्रदर्शनी, चंबल के विभिन्न आयामों को समझने में मददगार साबित होगी।

बताते चले कि चंबल संग्रहालय में अब तक करीब 21 हजार पुस्तकें-पत्रिकाएं, सैकड़ों दुर्लभ दस्तावेज, विभिन्न रियासतों के डाक टिकट, विदेशों के डाक टिकट, राजा भोज के दौर से लेकर अब तक सैकड़ों प्राचीन सिक्के, सैकड़ों ग्रामोफोन रिकार्ड, सैकड़ों दस्तावेजी फिल्में आदि उपलब्ध हैं। यहां वह किताब भी मौजूद है, जिसके हर पन्ने पर सोना है। यहां दुर्लभ और दुनिया के सबसे पुराने स्टांप, डाक टिकट के साथ ही ब्रिटिश काल से लेकर दुनिया भर के करीब चालीस हजार से अधिक डाक टिकट मौजूद हैं। गजेटियर, प्राचीन तस्वीरें, समाचार पत्र, पांडुलिपि आदि गिफ्ट मिल रहे ज्ञानकोष से चंबल संग्रहालय हर दिन समृद्ध होता जा रहा है। डिजिटाइजेशन, लेमिनेशन आदि पर बीते तीन महीने से शिद्दत से काम चल रहा है।

क्रांतिकारियों के मुकदमें से जुड़ी फाइलों के अलावा इस संग्रहालय में हिन्दी साहित्य की पत्रिकाओं का जखीरा मौजूद है। इसमें सरस्वती, माधुरी, चांद, प्रभा, सुधा, विश्वमित्र, सुकवि, कन्या मनोरंजन, नवजीवन विशाल भारत, हंस, सारिका, धर्मयुग, दिनमान, साप्ताहिक हिन्दुस्तान आदि सहित देश-विदेश की साढ़े आठ हजार दुर्लभ पत्रिकाओं के अतिरिक्त साहित्यकारों की दुर्लभ कृतियां भी हैं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि सैड़कों पत्रिकाओं के प्रवेशांक भी मौजूद हैं। आजादी के पहले के कुछ मैगजीनों के भेजे गए टिकट लगे लिफाफे भी संरक्षित किये गए हैं।

के. आसिफ चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के दूसरे संस्करण की तैयारियां जोरो पर हैं। 24 से 26 नंबवर तक चलने वाले तीन दिवसीय चंबल फिल्म फेस्टिवल से देश-विदेश की सरोकारी शख्सियतें जुड़ रही हैं।

सिनेमा हमारा औजार है। देश के अलग-अलग हिस्सों में एक दशक से अधिक समय से फिल्म फेस्टिवल का आयोजन करने वाले प्रसिद्ध दस्तावेजी फिल्म निर्माता शाह आलम विभिन्न जगहों पर फिल्म फेस्टिवल के मार्फत लगातार सिनेमा के जरिए मुद्दों को उठाते रहैं हैं। 17-18मार्च 2010 को चंबल के बीहड़ों में सम्पन्न हुए फिल्म फेस्टिवल में भारतीय सेना में ‘चंबल रेजीमेंट बनाने’, 9 अगस्त 2015 को इस रीजन में पहला ‘चंबल विश्वविद्यालय’ खोलने का महाभियान शुरू किया। 25 मई 2017 को पांच नदियों के संगम स्थल पर ‘चंबल जनसंसद’ में इस दुर्गम घाटी को विशेष पैकेज देकर विकास करने, अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र से जोड़ने, तथा इस ‘फिल्मलैण्ड’ में फिल्मसिटी बनाने आदि मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाया था। आज भी चंबल घाटी की असीम संभावनाओं की राह दिखाने के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने का काम कर रहे हैं।

फिल्म फेस्टिवल में शामिल होंगी यह शख्सियतें: के आसिफ चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के दूसरे संस्करण में कई देशों की चुनिंदा फिल्मों का प्रदर्शन इटावा शहर के जिला पंचायत सभागार में किया जाएगा। फिल्म फेस्टिवल में दुनिया की 125 भाषाओं में गजल गाकर तीन बार गिनिज बुक में अपना नाम दर्ज कराने वाले डा. गजल श्रीनिवास, प्रसिद्ध संगीत समीक्षक डा. राजीव श्रीवास्तव, ईरानी फिल्मकार डा.मंसूर येजदी, आज तक के फिल्म संपादक अनुज शुक्ला, प्रसिद्ध फिल्मकार एम. मलिक, निर्देशक मोहन दास, सतेन्द्र त्रिवेदी, फिल्म अभिनेता अजय महेन्द्रू, पूर्व बागी सरगना बलवंत सिंह तोमर, पूर्व दस्यु सुंदरी व अभिनेत्री सीमा परिहार, बागी हरि सिंह पवार, मुन्ना सिंह मृदा, अभिनेता रफी खान, फिल्म निर्देशक धर्मवीर उपाध्याय, सूफी गजल गायक रोहित हितेश्वर आदि शामिल होंगे। 24 से 26 नवंबर तक इटावा में साहित्य-सिनेमा प्रेमियों का जमावड़ा रहेगा। देश-दुनिया में बसे तमाम दिग्गज कार्यक्रम की सफलता के लिए लगातार मुहिम में जुटे हैं।

इस पोस्ट पर आपकी प्रतिक्रिया ⇓