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अदालतों में कई बार इतने दिलचस्प मामले सामने आते हैं कि उनको लेकर सुर्खियाँ बन जाती हैं, वैसे  तो अपने बच्चों का नाम रखने का अधिकार माता पिता का होता है लेकिन केरल में एक ऐसा मामला भी सामने आया जहाँ कोर्ट को बच्चे का नाम रखना पड़ा। क्या है पूरा मामला आइये समझते हैं।

दरअसल मामला तलाक का है जहाँ पति पत्नी तलाक लेने की प्रक्रिया में हैं और केरल हाई कोर्ट के जज के जिम्मे एक अनोखा काम सौंपा गया, जब उन्होंने पांच साल के एक बच्चे का नामकरण किया। बच्चे के पैरंट्स अलग-अलग धर्म के हैं और उनके बीच नाम को लेकर छिड़े विवाद पर अदालत ने फैसला सुनाया।

गौरतलब है कि बच्चे के पिता हिंदू हैं और वह उसका नाम ‘अभिनव सचिन’ रखना चाहते थे, जबकि क्रिश्चन मां ‘जॉन मनी सचिन’ नाम पर अड़ी हुई थीं। जस्टिस एके जयशंकरन नांबियार ने आखिरकार बच्चे के नए नाम ‘जॉन सचिन’ के साथ जन्म प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश दिया।

बता दें कि बच्चे के पैरंट्स तलाक की प्रक्रिया में हैं और दोनों ने सहमति न बनने पर अपने-अपने नाम से बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र की मांग करते हुए याचिकाएं दायर की थीं। मां का दावा था कि ईसाई दीक्षा नामकरण सर्टिफिकेट पर उसका नाम जॉन मनी सचिन लिखा गया था, जबकि पिता का कहना था कि नामकरण संस्कार में बच्चे का नाम अभिनव सचिन रखा गया था, जब वह महज 28 दिन का था।

इस बाबत महिला ने बाद में कोर्ट से कहा कि वह बीच के हिस्से मनी को हटा सकती हैं लेकिन उनका पति अभिनव नाम रखने पर ही अड़ा हुआ है। आखिर फैसले में जज ने कहा, ‘दोनों ही पक्षों की बात रखते हुए कोर्ट ऐसे नतीजे पर पहुंचना चाहता है जिसमें दोनों की सहमति हो। इस आधार पर बच्चे को जॉन सचिन नाम दिया जा रहा है। जॉन मां का हिस्सा दर्शाएगा और सचिन उसके पिता का पहला नाम है, इस तरह उनकी बात भी रह जाएगी।’

अच्छा तो यही होता कि कोर्ट से बाहर माता पिता तय कर लेते कि बच्चे का क्या नाम रखना है, यह झगड़ा बचपने जैसा है।

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