फ़िल्म की रिलीज के समर्थन में अदालती आदेश के बावजूद करणी सेना ने फ़िल्म पद्मावत की रिलीज की राह में हिंसा के रोड़े अटकाने जारी रखे हैं।

पूरे देश में हिंसा पर उतारू प्रदर्शनकारियों ने उस समय कायरता की हदें पार कर दीं जब उन्होंने एक स्कूली बस पर पथराव किया वो भी तब जब उस बस में मासूम बच्चे सवार थे।

गौरतलब है कि देश की राजधानी दिल्ली से सटे गुरुग्राम में करणी सेना के कथित कार्यकर्ताओं ने एक स्कूल बस पर हमला कर दिया।

करणी सेना संजय लीला भंसाली की मूवी पद्मावत का विरोध कर रही है। करणी सेना के कार्यकर्ता फ़िल्म का विरोध कर रहे थे। तभी वहां से गुजर रही एक स्कूली बस पर हमला बोल दिया। बस में बैठे बच्चों पर करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया।
आ रही रिपोर्ट के मुताबिक इस पत्थरबाजी में दो बच्चे घायल हो गए। कहा तो यह भर जा रहा है कि करणी सेना के कार्यकर्ताओं के पास ‘पेट्रोल बम’ भी थे।

इस हमले में स्कूल की बस के शीशे तोड़ टूट गए। प्रदर्शन कर रही भीड़ ने जब स्कूल बस को रोका और उस पर हमला किया तो बस में सवार टीचर ने सभी बच्चों को फर्श पर लेट जाने को कहा। इस हमले से बच्चे डर गए और वहां चीख पुकार मच गई।

यह तो कायरता की इंतेहा ही हो गयी। एक फ़िल्म के विरोध के लिए बच्चों पर हमला करना भला कहाँ की बहादुरी है। जिस राजपूतों की शान के नाम पर विरोध हो रहा है उनसे पूछना चाहिए कि क्या यही राजपूतों करे शान है कि निहत्थे बच्चों पर हमला किया जाए?

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