फ़ाइल फोटो
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जमशेपुर : गिरिडीह के बाद चतरा में भूख से एक और महिला की मौत का मामला अब तूल पकडने लगा है।  झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने एक प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए  कहा कि झारखण्ड में सिंतबर 2017 से अब तक 11 लोग की मौत हुई है। बावजूद उसके सरकार संवेदनशील नहीं है।

गिरिडीह की सावित्री देवी तथा चतरा निवासी मीना मुसहर की मौत ने झारखण्ड को झकझोर कर रख दिया है। झारखण्ड सरकार आदतन जांच का आदेश देकर अपना पल्ला झाडने का प्रयास किया है। कांग्रेस पार्टी मृतकों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती है।

डॉ अजय कुमार ने कहा कि कांग्रेस पार्टी त्तकाल झारखण्ड के खाद्य आपुर्ति मंत्री श्री सरयू राय की इस्तीफे की मांग करती है। साथ ही साथ उन सभी पदाधिकारियों के उपर आपराधिक मुकदमे दर्ज करने की मांग करती है जिनके लापरवाही के कारण भूखमरी से लोगों की लगातार जानें जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गठित समीतियां उन तमाम निर्णयों को सार्वजनिक करे जो भूखमरी से हो रहें मौतों की जांच करने एवं भूखमरी से बचने के लिए नितिगत रूप में समीति के द्वारा लिए गये हैं। डॉ. अजय कुमार ने कहा कि हम सार्वजनिक वितरण प्रणाली सहित सभी कल्याणकारी कार्यक्रमो से आधार को तत्काल प्रभाव से डीलिंक किया जाए।

खाद्यान्न, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन योजना एवं अन्य सभी कल्याणकारी योजनाओं से आधार आधारित बायोमेट्रिक्स सिस्टम को समाप्त किया जाना चाहिए।  झारखण्ड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली एवं सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम का र्सावभौमिक कवरेज हो। उन्होंने कहा कि उपरोक्त धटनाओं में यह पाया गया है कि पांच मामलों में पीड़ित परिवार के पास राशन कार्ड नहीं था।

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एक मामले में परिवार के राशन कार्ड को इसलिए रद्द कर दिया गया क्योंकि यह आधार से लिंक नहीं था। डॉ. अजय कुमार कहा कि एक तरफ सरकार समावेशी विकास के दावे करते नहीं थकती और नारा देती है कि ‘सबका साथ सबका विकास’ फिर भूखमरी से लोग काल के गाल में समा रहें हैं, किसान आत्महत्या में मजबूर है। रिम्स जैसे प्रतिष्ठीत अस्पताल में सरकार की संवेदनहीनता एवं उपेक्षा के कारण दो दर्जन से अधिक लोगों की मृत्यु हो जाती है।

उन्होंने कहा कि चार मामलों में परिवार पीडीएस खाद्यान्नों तक पहुंचने के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की अनिवार्य आवश्यकता के कारण राशन तक नहीं पहुंच सका। सरकार के अपने आंकड़ों के अनुसार, आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के कारण हर महीने कम से कम 6-11 लाख परिवार को हर महीने अपने अनाज से वंचित कर दिया जाता है।

डॉ. अजय कुमार ने कहा कि कितना दुख:द है कि एक मामले में पीड़ित का अपनी पेंशन राशि प्राप्त नहीं हुई क्योंकि उसे अपने आधार से जुड़े किसी और के बैंक खाते में जमा किया जा रहा था। पीड़ितों को पीडीएस खाद्यान्नों से भी इनकार कर दिया गया था, भले ही उन्होंने आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के माध्यम से सफलतापूर्वक प्रमाणित किया गया था।

उन्होंने ने कहा कि अधिकांश परिवारों को मनरेगा के तहत रोजगार भी नहीं मिल पाया था। साथ ही साथ यह और भी दुखद हो जाता है कि अब तक इन घटनाओं से संबंधित दोषी आधिकारियों पर कोई कारवाई नहीं की गई है। सरकार और प्रशासन के तरफ से सिर्फ जांच के नाम पर लिपापोती का प्रयास किया जाता रहा है और इस बार भी सरकार इसी प्रयास में लगी है।

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कांग्रेस  मांग

  • झारखंड के खाद्य मंत्री श्री सरयू रॉय का इस्तीफा
  • सभी अधिकारियों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जिनके लापता होने से भुख के कारण मौत हो गई
  • भुखमरी से मौतों की जांच करने और भूख से बचने के लिए नीतिगत सिफारिशें प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा गठित समिति द्वारा किए गए कार्यों को सार्वजनिक करना।
  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अन्य सभी कल्याण कार्यक्रमों से आधार की तत्काल डीलिंकिंग
  • खाद्यान्न, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और अन्य सभी कल्याण अधिकारों तक पहुंचने के लिए आधार आधारित बॉयोमीट्रिक प्रमाणीकरण की तत्काल समाप्ति
  • झारखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली और सामाजिक सुरक्षा पेंशन का सार्वभौमिक कवरेज
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