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देश भर के मंदिरों की मूर्तियों पर दूध चढ़ाया जाता है, देखने सुनने में भले ही यह एक सामान्य धर्मकर्म विधि लगे लेकिन यह भी सच है कि इस परंपरा के चलते देश भर के मंदिरों में हर महीने लाखों लीटर दूध बर्बाद होता है।

इस कड़ी में एक सुखद बात यह है कि इस परम्परा को बंद करने के लिए कुछ ठोस कदम उठाये जा रहे हैं। गौरतलब है कि इस बाबत मथुरा प्रशासन ने पहल की है। उत्तर प्रदेश के मथुरा में गोवर्धन मंदिरों से पांच दिन के अंदर दूध बहना बंद नहीं हुआ तो मंदिर प्रशासन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बात दें कि यह सख्त आदेश मथुरा प्रशासन ने गोवर्धन के चारों मंदिरों की मैनेजमेंट कमिटी को दिया है। मंदिर मैनेजमेंट कमिटी को पांच दिन के अंदर दूध को रीसाइकल करने के लिए ईटीपी (इन्वाइरनमेंट ट्रीटमेंट प्लांट) लगाने को कहा गया है।

गौरतलब है कि नैशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) ने मंदिर मैनेजमेंट को मंदिरों से नालियों में बह रहे दूध को रोकने का आदेश दिया था। मंदिर प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की तो नाराज जिला प्रशासन ने अब सख्ती दिखाई है। एसडीएम डीपी सिंह ने बताया कि मंदिर प्रशासन को यह आदेश 9 मई को दिया गया है। जो ईटीपी प्लांट लगेगा वह दूध को पानी बनाएगा। उस पानी को सिंचाई और दूसरे कामों में लाया जा सकेगा।

एसडीएम ने बताया कि गोवर्धन के चार मंदिरों में से अकेले गिरिराज मंदिर से हर महीने लगभग एक लाख लीटर दूध चढ़ाया जाता है। उन्होंने बताया कि मुकुट मुखारविंद मंदिर, दानघाटी मंदिर, हरगोकुल मंदिर और मुखारविंद जातिपुरा मंदिरों को नोटिस भेजा गया है। उनके पास सिर्फ 14 मई तक का समय है।

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उन्होंने बताया कि गिरिराज परिक्रमा संरक्षण एनजीओ ने एनजीटी में शिकायत की थी कि मंदिरों से नालियों में बहने वाले दूध से आसपास बदबू फैलती है। जिसके बाद एनजीटी ने मंदिरों को कार्रवाई के लिए कहा था। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 मई को है।

अब देखना है कि यह सन्देश देश भर के मंदिरों में किस तरह जाता है, आशा तो यही करनी चाहिए कि दूध की बर्बादी जल्द ही रुके।

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