हिंद वॉच मीडिया रेटिंग : साढ़े तीन स्टार 
फ़िल्म का नाम : फुकरे रिटर्न्स  FUKREY RETURNS
सेंसर सर्टिफिकेट : U/A
जॉनर : कॉमेडी
अवधि : 2 घंटे, 21 मिनट    
निर्माता :  फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी
निर्देशक : मृग्दीप सिंह लाम्बा
कथा, पटकथा और संवाद : विपुल विग
कलाकार : पंकज त्रिपाठी, ऋचा चड्ढा, वरुण शर्मा, पुलकित सम्राट, अली फजल, मनजोत सिंह, राजीव गुप्ता और प्रिया आनंद
संगीत : समीर उद्दीन, राम संपत, प्रेम हरदीप और सुमीत बेल्लारे

पिछले दो-तीन सप्ताह में कई फ़िल्में बुरी तरह से पीट गयी हैं। ऐसे में “फुकरे रिटर्न्स” से लोगों को बहुत उम्मीदें हैं। ‘फुकरे’ ने 2013 में बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया था। फ़िल्म की ताजगी और किरदारों की मासूमियत लोगों को पसंद आयी थी। लोग उस मासूमियत को इस फ़िल्म में भी ढूँढ रहे हैं। रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर की कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट आश्वस्त होकर चार साल बाद ‘फुकरे’ का सीक्वल लेकर आयी है। सीक्वल के कई फायदे निर्माताओं को दिखते हैं। एक तो यह कि रिस्क थोड़ा कम हो जाता है और किरदारों के बारे में लोगों को पहले से मालूम होता है। इससे  फ़िल्म को लेकर एक स्वाभाविक उत्सुकता दर्शकों में रहती है।

कहानी में चार फुकरे हैं, उनमें एक चुचा है जिसको सपने आते हैं। चुचा के सपनों का विवरण लेकर हनी कुछ नंबर बनाता है। चारो मिलकर उस नंबर की लॉटरी खरीदते हैं और वह लॉटरी लग जाती है। चुचा के सपनों का विवरण और लॉटरी का लगना यही इस फ़िल्म का बीज है। कहानी में तर्क और वास्तविकता से कुछ भी लेना-देना नहीं है। कॉमेडी फिल्मों के केन्द्रीय तत्व अमूमन ऐसे ही या इससे मिलते-जुलते होते हैं। जैसे कि “गोलमाल अगेन” में एना को भूत और आत्माएँ दिखायी देती हैं।

इन फुकरों की मुलाकात भोली पंजाबन से होती है। इनके साथ मिलकर वह लॉटरी खेलने के लिए पैसे लगाती है और उसको बहुत फायदा होता है। ऐसे में उसे एक दिन घाटा हो जाता है और जेल भी जाना पड़ता है। फुकरे की कहानी यहीं ख़त्म होती है।

यहीँ से शुरू होती है ‘फुकरे रिटर्न्स’ की कहानी लेकिन एक साल का समयांतर है। भोली पंजाबन का असली भोलापन तो आपको फ़िल्म में देखने को मिलेगा। हाँ तो भोली पंजाबन जेल में बहुत बोर हो गयी है। वह मिनिस्टर से संपर्क करती है। मिनिस्टर करोड़ों रुपए माँगता है और वह देने के लिए तैयार हो जाती है।

जेल से छूटने के बाद उसे पैसों का इंतजाम करना है। वह फुकरों को पैसा वसूलने के लिए बुलाती है। चारो फुकरों के साथ हैं पंडितजी जो कॉलेज में काम करते थे। अब ये पांचो भोली पंजाबन के सामने हैं और उसे करोड़ों रुपए चाहिए। यहाँ से इनका अभियान शुरू होता है।

मिनिस्टर भोली पंजाबन के पीछे पड़ जाता है। वह उनसे पीछा छुड़ाने के लिए मुख्यमंत्री को कम्पलेन करती है। वह कभी फुकारों के साथ होती है, कभी नहीं होती है। कहानी में उतार-चढ़ाव और कई मोड़ आते हैं। इसमें कॉमेडी चलती रहती है और कहानी आगे बढ़ती है।

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निर्देशक मृग्दीप सिंह लाम्बा की नैरेटिव पर पकड़ है। वे कहानी को रोचक बनाए रखते हैं। पहले से उनके पास ‘फुकरे’ का कामयाब फ़ॉर्मूला है, जिसको इस फ़िल्म में उन्होंने बनाए रखा है। विपुल विग और मृग्दीप सिंह लाम्बा का स्क्रीनप्ले अच्छा है। संगीत ठीक-ठाक है। सिनेमेटोग्राफी स्तरीय है।

पंकज त्रिपाठी का अभिनय इस फ़िल्म का एक मजबूत स्तम्भ है। उनकी अदाकारी का कोई भी दीवाना हो जायेगा। उनके चेहरे के हाव-भाव देखने लायक है। कॉमेडी की उनकी टाइमइंग अद्भूत है। केवल पंकज त्रिपाठी के लिए भी यह फ़िल्म देखी जा सकती है। ऋचा चड्ढा और वरुण शर्मा की अदाकारी भी उल्लेखनीय है। राजीव गुप्ता ने अपना काम अच्छा किया है। बाकी के कलाकार भी अच्छे हैं।

फ़िल्म में भरपूर मसाला है। यह दर्शकों को खूब एंटरटेन करेगी। निचे दिए लिंक पर क्लिक करके फ़िल्म का ट्रेलर देखा जा सकता है :

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