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राँची : झारखण्ड की पृष्ठभूमि पर बनी पहली फीचर फिल्म, आक्रान्त, के निर्देशक विनोद कुमार ने 24 मई की शाम हिंद वॉच मीडिया के झारखण्ड राज्य कार्यालय में प्रधान संपादक सुशील स्वतंत्र से मुलाक़ात किया। झारखण्ड की मौजूदा परिस्थितियों, साहित्य और कला-संस्कृति से जुड़े मुद्दों पर दोनों के बीच लम्बी चर्चा हुई। इस मुलाकत में कवि, लेखक एवं फिल्मकार विनोद कुमार ने अपनी कविताओं के दो संग्रह “दफ़न होते हुए…” और “जंगल की जागती आँखें ढूंढती सल्तनत” प्रधान संपादक सुशील स्वतंत्र को भेंट किए।

अपनी फिल्म ‘आक्रांत’ के बारे में बताते हुए विनोद कुमार ने कहा कि “यह पहली ऐसी फिल्म है जो छोटानागपुर के आदिवासियों के जीवन संघर्ष और उनके समाज में हो रहे बाहरी दखलंदाजी को रेखांकित करती है। वे कहते हैं कि इस फिल्म में झारखण्ड का नैसर्गिक सौन्दर्य भी है, आदिवासियों की उदासी भी और चौतरफा हमले से फैला सांस्कृतिक प्रदुषण भी। अब फिल्म का डिजिटलाईजेशन कर लिया गया है और एक बार फिर से फिल्म को पर्दे पर उतारने की तैयारी की जा रही है।” मुलाक़ात के दौरान झारखण्ड में फिल्म निर्माण से जुडी संभावनाओं और चुनौतियों पर भी चर्चा हुई।

 

हिंद वॉच मीडिया के प्रधान संपादक सुशील स्वतंत्र ने कहा कि वे इस मुलाक़ात और हिंद वॉच को समय देने के लिए आभारी हैं। फिल्म आक्रांत की पृष्ठभूमि और विषयवस्तु के बारे में सुनकर फिल्म देखने की गहरी लालसा हो रही है। सुशील स्वतंत्र ने विनोद कुमार से अनुरोध किया कि जब कभी भी आक्रान्त की स्क्रीनिंग करने का कार्यक्रम हो वे सहर्ष उपस्थित रहेंगें। सुशील स्वतंत्र ने यह भी कहा कि अंग्रेजी भाषा का प्रोफ़ेसर हिंदी की इतनी अच्छी कवितायें लिख सकते हैं, यह देखकर बेहद सुखद आश्चर्य हो रहा है। कविता संग्रह भेंट करने के लिए सुशील स्वतंत्र ने विनोद कुमार का आभार व्यक्त किया।

लगभग दो घंटे की इस मुलाक़ात के दौरान हिंद वॉच मीडिया झारखण्ड के सह-संपादक कुमार कौशलेन्द्र भी मौजूद थे।

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