लड़कियों प्रतिरोध करो, जायरा को चीखना चाहिए था। सिर आसमान पर उठा लेना चाहिए था। कोई आपको मोलेस्ट कर रहा है, तब आप चुप तब तक मत रहिये जब तक आपकी अथवा आपके परिवारीजन की जान को कोई खतरा न हो। जायरा वसीम चुप रहीं, वीडियो बनाती रही, कोई वजह तो जरूर होगी, उस पर सवाल उठाना मेरे अधिकार क्षेत्र में नही है, मगर बच्चियों लड़कियों औरतों प्रौढाओं बृद्धाओं चुप मत रहो। शोर करो चीखो, मजमा लगाओ। जो बन पड़े करो मगर चुप मत रहो।

जायरा वसीम के साथ हुई छेडखानी बेहद निंदनीय है। किसी भी स्त्री के लिए इससे घृणित कोई अहसास नही होता। मुझे मुम्बई पहुंचे कुछ रोज ही हुए थे। प्रतापगढ़ जैसी छोटे से शहर से निकल कर मुंबई पहुंची लड़की उस शहर को फटी फ़टी आंखों से देखती थी। हमारे शहर में सब एक दूसरे को पहचानते थे यहाँ किसी को फुर्सत नही थी जान पहचान की। पहली बार लोकल ट्रेन में चढ़ी थी हस्बैंड ने कहा कि तुम महिलाओं के डिब्बे में चली जाओ मगर मुझमे हिम्मत ही नही थी । हर वक्त छूट जाने का डर लगा रहता था ।

खैर ….. अब आते हैं असली बात में ट्रेन में तो किसी तरह चढ़ गई दो स्टेशन के बाद उतरना था। हम दोनों गेट से के पास खड़े हो गए। ट्रेन चली ही थी कि मुझे लगा पीछे खड़ा व्यक्ति मेरे कंधे से अपना कन्धा रगड़ रहा है। पहले मुझे लगा यह मेरा भरम है गाड़ी के तेज गति की वजह से असावधानी वश ऐसा हो रहा है। बड़े शहर में शायद इसका बुरा नही मानते इतनी तो भीड़ है कोई कब तक सम्भाले रहे खुद को।

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अगला स्टेशन आ गया कुछ लोग उतरे कुछ चढ़े भी। मैंने पीछे पलट कर देखा घनी मूँछो वाला एक अधेड़ सा आदमी था वो मूझे देख कर मुस्कुराया। मुझे कुछ अटपटा से लगा मगर मैं सहज बनी रही। वो चार पांच लोगो के समूह में था। वे सब मराठी में बात कर रहे थे, जो मुझे बिल्कुल समझ नही आ रही थी।

हस्बैंड एकदम गेट के पास खड़े थे। ट्रेन चल पड़ी अभी कुछ सेकंड ही गुज़रे होंगे कि उस व्यक्ति का कंधा फिर से मुझसे टकराने लगा। मैँ कुछ कहना चाह रही थी फिर सोचा अगले स्टेशन ही तो उतरना है। अवॉयड कर देते हैं। मगर यह क्या, उसका हाथ मेरी कमर के खुले हुए हिस्से पर मुझे महसूस हुआ (उस वक्त रखी थी) मैं तो भस्म हो गयी और अपने प्रतापगढ़ी अवतार में आ गयी। अपने चार नाखून कस कर उसके हाथ मे गड़ा कर तेजी से खींच लिए। मेरे नाखूनों में उसकी खाल उतर आई थी और उसके हाथ से खून टपकने लगा था।

हमारा स्टेशन आ गया था नीचे उतरते ही हस्बैंड से कहा एक साबुन खरीद दीजिये हाथ धोना है। फिर उनके पूछने पर उन्हें पूरी घटना सुनाई। उन्होंने कहा मुझे बोलना था न। मैने कहा वह चार पांच थे आप गेट से सट कर खड़े थे अगर आप उलझते और वे आपको धक्का दे देते तब क्या होता?

इस पूरी कहानी सुनाने का आशय यही है लड़कियों प्रतिरोध करो जायरा को चीखना चाहिए था। सिर आसमान पर उठा लेना चाहिए। कोई आपको मोलेस्ट कर रहा है तब आप चुप तब तक मत रहिये जब तक आपकी अथवा आपके परिवारीजन की जान को कोई खतरा न हो।

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जायरा वसीम चुप रहीं, वीडियो बनाती रही, कोई वजह तो जरूर होगी, उस पर सवाल उठाना मेरे अधिकार क्षेत्र में नही है, मगर बच्चियों, लड़कियों, औरतों, प्रौढाओं, वृद्धाओं चुप मत रहो। शोर करो चीखो, मजमा लगाओ। जो बन पड़े करो मगर चुप मत रहो।


इंस्ट्राग्राम पर मौजूद ये दो विडियो ज़ायरा वासिम के साथ हुई छेड़खानी के बाद अपलोड किये गए हैं :

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