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किसी भी  महिला के साथ घर की चहारदीवारी के अंदर होने वाली किसी भी तरह की  हिंसा,  मारपीट, उत्पीड़न आदि के मामले घरेलू हिंसा कानून के तहत आते हैं। यौन  उत्पीड़न के  मामलों में अलग कानून है लेकिन उसे इसके साथ जोड़ा जा सकता है।

महिला को  ताने देना, गाली देना, उसका अपमान करना, उसकी मर्जी के बिना उससे  शारीरिक  संबंध बनाने की कोशिश करना, जबरन शादी के लिए बाध्य करना आदि जैसे  मामले  भी घरेलू हिंसा के दायरे में आते हैं। पत्नी को नौकरी छोड़ने के लिए  मजबूर  करना, या फिर नौकरी करने से रोकना, दहेज की मांग के लिए मारपीट करना  आदि  भी इसके तहत आ सकते हैं।

दुनिया भर के 81 देशों की एक तिहाई महिला घरेलू हिंसा से पीड़ित हैं। इसके कई प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष प्रभाव से उनका घर व परिवार भी प्रभावित होता है। विकासशील देशों में घरेलू हिंसा की जानकारी के लिए डोमेस्टिक एंड हेल्थ सर्वे ने 90 से अधिक विकासशील देशों में 300 से अधिक सर्वेक्षण किये।

सास से सवाल जवाब करने पर, बच्चों की सही देखभाल न होने पर, दो से ज्यादा बेटियां होने पर घरों में उन्हें प्रताड़ित किया जाता है।

उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध में दहेज प्रताड़ना के मामले ज्यादा बढ़ रहे हैं। राज्य महिला आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक इस वर्ष अब तक आयोग के पास 35,398 शिकायतें आईं, जिनमें से 5003 मामले दहेज प्रताड़ना के हैं।

न्यायाधीश दिनेश राय ने संबोधित करते हुए घरेलू हिंसा 2006 के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि घरेलू हिंसा के तहत सिर्फ घर की महिलाएं ही नहीं संबंधित घर की दाई आदि भी अपने उत्पीड़न का मामला दर्ज करा सकती है।

हरियाणा में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो, 2016 के आंकड़ों 3314 महिलाओं को घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा। महिलाओं के प्रति होने वाली हिंसा और अत्याचार के मामले में राजस्थान घरेलू हिंसा के 13,814 मामले दर्ज किए गए।

पंजाब में हर 5वीं महिला घरेलू हिंसा की शिकार है। यह खुलासा हुआ है नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 (2015-2016) की रिपोर्ट में। प्रदेश 20।5 प्रतिशत महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार हैं।

इसमें 19 प्रतिशत विवाहित महिलाएं हैं। हैरानी की बात यह है कि इसमें से 63 प्रतिशत महिलाएं घरेलू हिंसा के खिलाफ न तो किसी को बताती हैं और न ही इसके खिलाफ आवाज उठाती हैं। वह चुपचाप इस दंश को झेल रही हैं। क्योंकि वे जानती हैं कि अगर उन्होंने ऐसा किया तो मायके और ससुराल दोनों घरों के द्वार उन के लिये सदा के लिये बंद हो जायेंगे।

रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में 60 प्रतिशत मामलों में पाया गया, कि हिंसा के वक्त पति शराब के नशे में होते हैं।

ये आंकड़े और केस स्टडी बताते हैं कि धनबाद में घरेलू हिंसा का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। कहीं वह दहेज प्रताड़ना का शिकार हो रही हैं तो कहीं शराबी पति के जुल्म का। कहीं पति दूसरी शादी कर लेता है तो कहीं बेटी के जन्म लेने पर उसे प्रताड़ित किया जाता है। कहीं सास प्रताड़ित करती हैं तो कहीं पति खाना-खोराकी बंद कर देता है।

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