Print Friendly, PDF & Email



एक बार फिर से एक विवाद ने दक्षिण भारत में आग लगा दी है, इस बार इस आग का शिकार हुआ है तमिलनाडु। गौरतलब है कि तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्टरलाइट कॉपर प्लांट का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की फायरिंग में 13 लोगों की मौत के बाद वहां तनाव कायम है। तूतीकोरिन में पांच दिन के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।

इतना ही नहीं संवेदनशील इलाकों में भारी संख्या में पुलिसबल तैनात किया गया है। पुलिस फायरिंग के विरोध में डीएमके भी उतर आई है। डीएमके ने पुलिस गोलीबारी में नागरिकों की मौत और वर्तमान एआईएडीएमके सरकार के खिलाफ 25 मई को तमिलनाडु में राज्यव्यापी बंद बुलाया है। इस बीच, तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तूतीकोरिन के जिलाधिकारी को स्टरलाइट यूनिट की बिजली आपूर्ति काटने का आदेश दिया है। बोर्ड को पता चला है कि रोक के बावजूद यूनिट में उत्पादन शुरू कर दिया गया था। दरअसल, यूनिट को निर्देश दिया गया था कि लाइसेंस रिन्यू होने तक उत्पादन बंद रहेगा।

गौरतलब है कि तमिलनाडु के तूतीकोरिन में 22 मई को कॉपर प्लांट से हो रहे प्रदूषण के चलते इसका विरोध कर रहे लोगों पर पुलिस फायरिंग में 13 लोगों की जान गई थी और 70 लोग घायल हो गए थे। घायलों का नजदीकी अस्पताल में इलाज चल रहा है। इस कार्रवाई के विरोध में डीएमके ने 25 मई को पूरे राज्य में बंद के ऐलान के साथ ही स्टरलाइट कॉपर प्लांट को पूरी तरह बंद करने की मांग की है। डीएमके ने इस कार्रवाई को लेकर राज्य सरकार को भी घेरा है।

आपको बता दें कि तूतीकोरिन में पांच दिन के लिए इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। बुधवार रात 9 बजे से सुरक्षा के मद्देनजर सस्पेंड इंटरनेट सेवाएं अगले पांच दिनों तक बंद रहेंगी। बता दें, हिंसा में शामिल होने को लेकर पुलिस ने अब तक 67 लोगों को गिरफ्तार किया है। इससे पहले बुधवार को मद्रास हाईकोर्ट ने हिंसा और पुलिस फायरिंग में मारे गए नागरिकों के शवों को अग्रिम आदेश तक संभालकर रखने का आदेश दिया है।

उधर, मुख्यमंत्री के. पलनीस्वामी ने शहर में स्थिति की समीक्षा के बाद जांच के आदेश दिए हैं। सरकार ने बुधवार को तूतीकोरिन मामले की जांच की जिम्मेदारी मद्रास हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश अरुणा जगदीशन को सौंपी है। बता दें कि स्टरलाइट से होने वाले प्रदूषण को देखते हुए स्थानीय लोग कई महीनों से यहां स्टरलाइट कॉपर यूनिट को बंद करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने इस बात की चेतावनी भी दी थी कि अगर प्लांट को बंद नहीं किए जाने की स्थिति में डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर ऑफिस तक मार्च निकाला जाएगा। यूनिट के खिलाफ मंगलवार को सड़कों पर उतरे लोगों के उग्र होने के बाद हिंसा फैल गई थी।

आखिर क्यों हो रहा है विवाद, आइये जानते हैं। इस प्लांट में हर साल 4,00,000 टन कॉपर कथोड बनता है, जिसे कंपनी बढ़ाकर 8,00,000 करना चाहती है। स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी समस्या इस प्लांट से होने वाले प्रदूषण से है। प्लांट 27 मार्च से बंद है। इसे पहले 15 दिन के लिए मेंटेनेंस का काम करने के लिए बंद किया गया था।

उस दौरान तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी को अप्रैल में यूनिट चलाने का लाइसेंस यह कहकर देने से मना कर दिया था कि वह स्थानीय पर्यावरण कानून का पालन नहीं कर रही है। स्टरलाइट ने इसे चुनौती दी। बोर्ड ने मामले पर सुनवाई की अगली तारीख 6 जून तय की है। इससे पहले जून 2013 में भी राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में एक केस के कारण भी कंपनी को बंद किया गया था।

बोर्ड का आरोप है कि कंपनी प्लांट से निकला कॉपर स्लैग सीधे नदी में डालती है। कंपनी प्लांट के पास मौजूद बोरवेल के पानी का ग्राउंडवॉटर अनैलेसिस भी नहीं कराती है जबकि पानी प्रदूषित हो रहा है।

स्थानीय लोग पिछले लगभग 100 दिन से इस प्लांट को बंद करने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने ऐलान किया था कि मंगलवार को तूतीकोरिन जिला कलेक्टरेट तक वह एक मार्च भी निकालेंगे। उनका आरोप है कि प्लांट के कारण उनके इलाके में पीने का पानी प्रदूषित हो रहा है और बीमारियां बढ़ रही हैं।

एक ऐक्टिविस्ट ग्रुप ने प्रदूषण बोर्ड पर कंपनी को स्टैंडर्ड से छोटी चिमनियों के इस्तेमाल की अनुमति देने का आरोप भी लगाया है। आरोप है कि इससे कंपनी का खर्च कम हुआ और पर्यावरण को ज्यादा नुकसान पहुंचा।

उधर, स्टरलाइट कॉपर के सीईओ पी. रामनाथ का कहना है कि प्लांट में राष्ट्रीय पर्यावरण इंजिनियरिंग अनुसंधान संस्थान (NEERI) और सुप्रीम कोर्ट के सभी निर्देशों का पालन किया जाता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अब वहां इंटरनैशनल फाइनैंस कॉर्पोरेशन के भी मानकों का पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्लांट से प्रदूषण नहीं हो रहा है, लोग खुद प्लांट में आकर सब देख सकते हैं। हालांकि, कार्यकर्ताओं ने उनकी यह बात नहीं मानी क्योंकि उनका दावा है कि प्रदूषण प्लांट के अंदर नहीं, बाहर हो रहा है।

इन सबके बीच प्लांट का समर्थन करने वाले लोग भी इसे दोबारा शुरू कराने की कोशिश में लगे हैं। तूतीकोरिन स्टीवडोर्स असोसिएशन के अध्यक्ष टी. वेलसंकर का कहना है कि स्टरलाइट अकेली कंपनी है जो हर साल 38 लाख मीट्रिक टन कार्गो का काम देखती है। उसके बंद रहने से हजारों मजदूरों के रोजगार पर असर पड़ रहा है।

वेलसंकर ने इसके लिए मुख्यमंत्री से भी बात की है। इसी तरह केमिकल इंडस्ट्रीज असोसिएशन और वाइंडिंग वायर मैन्युफैक्चरर्स असोसिएशन ने भी मजदूरों और छोटे उद्योगों के हक में प्लांट फिर से शुरू करने की अपील की है।

उधर, कॉपर की कीमतों में उछाल आया है। दरअसल, देश के प्राइमरी कॉपर मार्केट में 35 प्रतिशत हिस्सा इस प्लांट का है। यहां से खाड़ी और एशियाई देशों में निर्यात भी होता है। भारत में कॉपर की खपत पिछले सालों में लगातार बढ़ती जा रही है। फिलहाल मांग में वृद्धि 7 प्रतिशत से 8 प्रतिशत हर साल हो रही है।

अप्रैल में कंसल्टंसी फर्म ICRA ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि अगर कोई नया प्लांट नहीं लगाया गया तो मार्च 2020 तक भारत को कॉपर का आयात करना पड़ जाएगा। इस बीच निर्माण कार्य पर अंतरिम स्टे को लेकर मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच आज सुनवाई करेगी।

इस पोस्ट पर आपकी प्रतिक्रिया ⇓
loading...