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सिनेमा अपने सामाजिक सरोकारों के साथ चल रहा है, यह देखकर खुशी होती है। हाल में एक फिल्म समारोह में एक फ़िल्म प्रदर्शित की गई, जिसका नाम था द कॉन्डम मैन, जी हाँ, यह फिल्म अपने साथ एक सन्देश भी देती है। दरअसल दिल्ली में समलैंगिकों के जीवन को रेखांकित करने के लिए नाटक और दुनियाभर से लाई गईं फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। दो दिवसीय इस सम्मेलन में ‘द कॉन्डम मैन’ फिल्म का भी प्रदर्शन हुआ, जिसमें आयरलैंड में हीमोफिलिक, एचआईवी और एड्स पीड़ितों के संघर्ष को दर्शाया गया है। हार्मलेस हग्स और इम्पल्स ने एड्स हेल्थकेयर फाउंडेशन के दिल्ली में दिल्ली इंटरनैशनल क्वीर थिअटर और फिल्म फेस्टिवल का आयोजन कराया।

बता दें, इसका उद्देश्य एलजीबीटीक्यूआई समुदाय के साथ मानवाधिकारों, स्वीकार्यता, एचआईवी की रोकथाम और सामान्य स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच के लिए उनके संघर्ष में जुड़ने का है। एएचएफ इंडिया केयर्स के कंट्री प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. वी. साम प्रसाद ने कहा, ‘दुनियाभर के देशों को एलजीबीटीक्यूआई समुदाय को गले लगाने में शामिल होना चाहिए। इन समुदायों की जरूरतों और कमजोरियों को समझना ही उन्हें मुख्यधारा में लाने की ओर पहला कदम है। अलगाव और इन साथियों की उपेक्षा के परिणामस्वरूप ज्यादा जोखिमपूर्ण व्यवहार सामने आएगा जो अक्सर कई संक्रमण और एसटीआई/एचआईवी आदि को आश्रय देगा। इसकी वजह से और अधिक जनसंख्या के बीच इसका प्रसार होगा।’ ऐसे सिनेमा को प्रोत्साहन मिलना चाहिए।

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