अभी कुछ दिन पहले ही फतवा आया था कि नौ बजे के बाद निकाह कराना गलत है। फिर स्कर्ट और जीन्स को लेकर फतवा आया। लेकिन इस बार तो हद ही हो गयी। दारुल अलीम का फतवा आया है जो कहता है कि अगर मुस्लिम औरतें पुरुष फुटबॉल देखेंगी तो यह हराम होगा।

21 वीं सदी में ऐसी बातें कहना कितना हास्यास्पद है, साफ दिख रहा है। ऐसी बातें दुनिया भर में भारत का मजाक बनाती हैं।

दरअसल यूपी के सहारनपुर स्थित दारुल उलूम देवबंद के मुफ्ती ने एक फतवा जारी किया है।

इस फतवे में कहा गया है कि मुस्लिम महिलाओं का फुटबॉल देखना इस्लाम के खिलाफ है और उन्हें पुरुषों को फुटबॉल खेलते हुए नहीं देखना चाहिए।

देवबंद के मुफ्ती अतहर कासमी के मुताबिक, यह इस्लाम के नियमों के विरुद्ध है और मुस्लिम महिलाओं के लिए यह हराम है।

दारुल उलूम से जुड़े हुए मुफ्ती कासमी ने उन पुरुषों को भी कठघरे में खड़ा किया, जो अपनी बीवियों को टेलिविजन पर फुटबॉल देखने की इजाजत देते हैं।

कासमी ने कहा, ‘क्या आपको शर्म नहीं आती? क्या आप ऊपरवाले से नहीं डरते हैं? आप उन्हें (अपनी बीवियों को) ऐसी चीजें क्यों देखने देते हैं।’

एक तरफ सऊदी अरब जैसा कट्टर देश है जो अपने यहां की महिलाओं को स्टेडियम में फुटबॉल मैच देखने की इजाजत दे रहा है और एक हम हैं जो इतने बड़े लोकतांत्रिक और लिबरल होने का दावा करते हैं लेकिन इतनी पिछड़ी जमाने की बातें करते हैं। हम कब इन तरह की धार्मिक कट्टरता से बाहर निकलेंगे।

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