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मूमन ऐसी चर्चा होती है कि दलित रचनाकारों को मुख्यधारा के साहित्यिक पटल पर समुचित स्थान नहीं मिल पाता है। ऐसी ही चिंता को ध्यान में रखकर डॉ. मुसाफिर बैठा और डॉ. कर्मानन्द आर्य ने ‘बिहार-झारखण्ड की चुनिन्दा दलित कविताएँ’ नाम से 56 दलित कवियों की 333 कविताओं को संकलित किया है।

सोशल मीडिया की वेबसाइट फेसबुक पर पोस्ट लिखते हुए डॉ. मुसाफिर बैठा ने कहा है कि “बिहार-झारखण्ड क्षेत्र से इस तरह का सम्भवतः यह पहला काम है।“ पेपर बैक पुस्तक के आकार में यह संकलन 450 से भी अधिक पृष्ठों का होगा। इस संकलन में कई ऐसे कवि भी होंगें जो पहली बार कहीं प्रकाशित हो रहे हैं। बोधि प्रकाशन, जयपुर ने इस संकलन का प्रकाशन किया है। फेसबुक पोस्ट के माध्यम से डॉ. मुसाफिर बैठा ने यह जानकारी दी कि इस संकलन का मूल्य ₹399/- होगा।

ऐसा माना जा रहा है कि दलित कवियों के इस संकलन के प्रकाशन के बाद साहित्य के क्षेत्र में दलित कवियों की रचनाएं, जिनमें आक्रोश के स्वर भी होंगें और प्रेम की कोमल भावनाएं भी, एक दमदार उपस्थिति दर्ज करवा पाएगी।

इस संकलन में डॉ. कर्मानंद आर्य, जियालाल आर्य, रामा शंकर आर्य, सौरभ आर्य, प्रहलाद दास, बिपीन बिहारी, बिपीन टाईगर, अजय यतीश, अरविन्द पासवान, राजू राही, अनुज बौद्ध, बिभाश कुमार, नागेन्द्र प्रसाद, महेंद्र नारायण राम, भूषण हंस, भीम शरण हंस, कपिलेश प्रसाद, बीआर विप्लवी,फकीर जय, उमेश कुमार, सुनील कुमार सुमन, कृत्यानंद कलाधर, बैद्यनाथ राम, देशदीपक दुसाध सहित 56 कवियों की 333 कविताओं को शामिल किया गया है।

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