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आप देश को विश्वशक्ति बनाने के खोखले दावे करते रहिए पर सच तो यही रहेगा कि देश में आज भी एक दलित को अपने नाम के साथ सिंह लगाने के लिए सजा दी जाती है।  ऐसी संकीर्ण और जातिवाद से भरे समाज में हम कहाँ तक जाएंगे, जरा सोचिए। आपको बता दें कि बनासकांठा जिले के वाव तालुका के गोलागाम गांव में दलित समुदाय के दूल्हे और परिवार पर हमले का मामला सामने आया है।

ख़बरों के एमानें तो स्थानीय ऐक्टिविस्ट दलपत भाटिया ने बताया कि पुलिस सुरक्षा के बीच दलित परिवार शादी की रस्में निभा रहा था। उसी दौरान दरबार उच्च जाति के लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दिया। इस दौरान दूल्हा भी घायल हो गए।

गौरतलब है कि वाव तालुका पुलिस स्टेशन के सब-इंस्पेक्टर हितेन्द्र भाटी ने बताया कि इस घटना के फौरन बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंच गई। मामले में आगे की जांच शुरू कर दी गई है। पीड़ित परिवार के अनुसार शादी के निमंत्रण पत्र में घर के दो बच्चों के नाम के आगे ‘सिंह’ लगा हुआ था। दरबार समुदाय के लोगों ने इस बात पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी।

दिलचस्प यह है कि दलित परिवार के मुखिया कांजी भद्रू खुद भी पुलिस में ही हैं। उन्हें करीब 50 धमकी भरे फोन आए। पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार करने के साथ ही शादी के लिए सुरक्षा व्यवस्था मुस्तैद कर दी थी।

उन्होंने बताया कि शादी के बाद जब उनके छोटे भाई सहित पूरा परिवार गांव के शिव मंदिर गया, उसी वक्त मौके पर दरबार समुदाय के लोग भी आ गए और पत्थरबाजी शुरू कर दी।

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उन्होंने बताया कि सिंह का इस्तेमाल करने और धमकी भरे फोन कॉल्स को लेकर एफआईआर दर्ज कराने के मामले में बदला लेने के इरादे से दरबार समुदाय के लोगों ने यह हमला किया। इससे पहले गांव में ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी।

क्या सिर्फ में सिंह लगाने या न लगाने कोई आदमी बड़ा या छोटा हो सकता है? जाहिर है यह दिमागी दिवालियापन से ज्यादा कुछ नहीं है।

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