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झारखण्डी धाम महोत्सव में शिरकत करने गिरीडीह पहुंचे मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं दी। इस दौरान श्री रघुवर दास ने कहा कि इस देश को किसी नेता ने नहीं, बल्कि ऋषि मुनियों ने बनाया है। एक वक्त भारत विश्वगुरु के रूप में जाना जाता था, हमें फिर से इसे विश्वगुरु बनाना है। इसी काम में एक युगपुरुष हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी लगे हुए हैं। 4 साल से लगातार भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।

अपने सरकार के कामों की तारीफ करते हुए श्री रघुवर दास ने कहा कि सरकार में आते ही हमने सांस्कृतिक पर्यटन पर जोर दिया। झारखंड के कण-कण में संस्कृति और आस्था है। आज मैंने भगवान से दर्शन और आराधना कर सिर्फ एक ही चीज मांगा कि इस समृद्ध राज्य की कोख में जो गरीबी पलती है,इसे खत्म करने की शक्ति भगवान मुझे प्रदान करें।

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि राज्य के धार्मिक पर्यटन स्थलों को तिरूपति की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है, ताकि धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि झारखण्ड राज्य का नाम ही झारखण्डधाम पर रखा गया है। इसलिए यह मात्र गिरिडीह का ही नहीं बल्कि पूरे राज्य के लिए पूजा-आराधना का एक प्रमुख स्थल है। इसे विकसित किये जाने में सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

श्री रघुवर दास ने कहा कि हमारा राज्य अमीर है, लेकिन यहां के लोग गरीब हैं। हमारा राज्य गरीबी का दंश झेल रहा है और अभाव की जिंदगी जी रहा है। गरीब के जीवन में बदलाव आए, इसके लिए मैंने भगवान से शक्ति मांगी है। यह शक्ति ही हमारे आत्मबल को मजबूत करेगी। जिस इंसान का आत्मबल मजबूत है, वह किसी भी परिस्थितियों में सफलता को प्राप्त कर सकता है। भगवान भोलेनाथ और हनुमान जी हमें इतनी शक्ति दें कि हम झारखंड की सवा 3 करोड़ लोगों के चेहरे पर मुस्कान ला सकें। पिछले साढ़े 3 सालों में हमारी सरकार इसी दिशा में काम कर रही है।

राज्य की तारीफ करते हुए श्री रघुवर दास ने कहा कि झारखंड एक ऐसा प्रदेश है, जहां पर अपार संभावनाएं हैं। हमारे पास कोयला, आयरन, सोना-चांदी, तांबा, जल, मेहनतकश मानव संसाधन बल सबकुछ है। कोई कारण नहीं है कि हमारा झारखंड देश के विकसित राज्य गुजरात और महाराष्ट्र से आगे न निकल सके।

श्री रघुवर दास ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 2022 तक संकल्प से सिद्धि और न्यू इंडिया का सपना देखा है। हमारी सरकार उसे पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। आप लोगों की मांग है कि यहां पर एक संस्कृत स्कूल और संस्कृत कॉलेज खोला जाए। मैं आपको बता दूं कि यहां की जनता के हित में जो भी अच्छा होगा, सरकार वो निर्णय लेगी।‍ संस्कृत हमारी प्राचीन भारत की भाषा है। संस्कृत से ही सभी भाषाएं निकली हैं, इसलिए इस भाषा का सही तरीके से संवर्धन हो, यह हमारी सरकार की सोच रहेगी। इसके साथ ही मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूं कि‍ आने वाले समय में झारखण्डी धाम और विकसित होगा।

रोजगार को लेकर श्री रघुवर दास ने कहा कि गरीबी उन्मूलन और रोजगार सृजन की दिशा में हमारी सरकार काम कर रही है। अगर हमें विकसित होना और आगे बढ़ना है तो यह बिना महिलाओं की सहभागिता के संभव नहीं होगा। क्योंकि इस राज्य की आधी आबादी हमारी महिलाएं हैं, इसलिए आपने देखा कि झारखंड देश का पहला राज्य बना, जहां हमने अपनी माताओं और बहनों के लिए मात्र 1 रुपए में रजिस्ट्री की सुविधा दी। जब से हमने 1 रुपए में रजिस्ट्री को लागू किया है, अब तक 53,000 हमारी माताएं-बहनें मालकिन बन चुकी हैं। आने वाले समय में हम ऐसी कई योजनाएं लेकर आ रहे हैं जिससे हमारी माताएं और बहनें स्वरोजगार से जुड़ेंगी और अपना घर चला पाएंगी।

हमारे किसान भाई को चिंता करने की जरुरत नहीं हैं। जो भी दूध का उत्पादन होगा, उतना दूध डेयरी वाले लेकर जाएंगे। जिस तरह बिहार में सुधा डेयरी हॉ, उसी तरह हमने झारखंड में मेधा डेयरी है। आप सभी से अनुरोध है कि आप मेधा डेरी के प्रोडक्ट को ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें। ये झारखंड के किसान के द्वारा लिया गया दूध से बनता है। ये मेधा डेरी आपके गांव से, आपके खटाल से दूध इक्कठा करेगा। हमने ये भी तय किया है कि जो सरकारी स्कूल में गरीब का बच्चा पढ़ता है जो कुपोषण का शिकार होता है, वैसे हर जिले में 10 हज़ार बच्चों को फ्री मेधा डायरी दूध देगी। इससे आने वाला झारखंड हृष्टपुष्ट होगा

युवाओं के रोजगार पर बोलते हुए मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि राज्य निर्माण के 14 साल तक हमारे युवाओं का सपना था कि अपना राज्य बनने के बाद हमें नौकरी मिलेगी, लेकिन 14 सालों तक राजनीतिक दलों ने स्थानीय नीति को सुलझाने के नाम पर अपनी मतपेटी भरने का काम किया। स्थानीय बेरोजगार युवाओं को नौकरी देने के लिए किसी भी सरकार ने पहल नहीं की। हमारी सरकार बनते ही स्थानीय नीति को परिभाषित किया और आज के दिन में 95 फीसदी नौकरियां सिर्फ और सिर्फ स्थानीय युवाओं को मिल रही हैं। इसके साथ ही माननीय मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जो एक लाख से ज्यादा सरकारी नौकरियां यहां पर मिलीं, उनमें से 95 फीसदी नौकरियां स्थानीय बच्चों को दी गई। इस पर विपक्ष ने जब हम पर आरोप लगाया तो हमने विधानसभा के पटल पर जिला वाइज पूरी जानकारी दी।

झारखंड देश ही नहीं, बल्कि दुनिया का पहला राज्य बना, जहां हमने 1 दिन में 27 हज़ार युवाओं को नियुक्ति पत्र दिया। इनमें से 10 हज़ार लोगों ने ज्वाइनिंग कर लिया है। इस बजट में हमने तय किया है कि हम हर जिले में 1 स्किल डेवलपमेंट सेंटर खोलेंगे, ताकि हमारे नौजवान प्रशिक्षण प्राप्त कर कहीं भी रोज़गार या स्वरोजगार प्राप्त कर सकें। इस तरह हमारी सरकार गरीबी को समाप्त करने के लिए बहुत सारी योजनाएं को चला रही है।

आज मैं विपक्षियों को चुनौती देता हूं कि स्थानीय नीति की बदौलत ही 95 फीसदी स्थानीय बच्चों को रोजगार मिला है। आज हम आरटीआई के जमाने में जी रहे हैं। कोई भी नेता या सामाजिक कार्यकर्ता मात्र 10 रुपये में किसी भी ज़िले में दी गई नौकरी की जानकारी इक्कठा कर सकता है।

हम अपने CRPF और पुलिस के जवानों का हृदय से आभार प्रकट करता हूं, जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर इस राज्य में अमन-चैन रहे, इसके लिए उग्रवाद को समाप्त किया। हमने उग्रवाद प्रभावित हर जिले से करीब ढाई हजार युवाओं को सहायक पुलिस के तौर पर भर्ती किया।

मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने कहा कि हमारे गांव के गरीब भाई-बहन भ्रष्टाचार और बिचौलियों के काफी त्रस्त रहते हैं। हमने ठाना है कि हम इस बिचौलिया प्रथा को भी खत्म करके मानेंगे। इसलिए जहां 50 फीसदी से ज्यादा आदिवासी परिवार हैं, वहां आदिवासी विकास समिति। जहां 50 फीसदी से कम हैं वहां ग्राम विकास समिति बनाने का निर्णय सरकार ने लिया है। अभी मैंने संथाल परगना में जा कर आदिवासी विकास समिति बनाने का काम किया है। हर ज़िला प्रशासन के द्वारा हर ज़िला में काम चल रहा है। हमने ये तय किया कि उन समितियों में भी अध्यक्ष महिला रहेगी और सचिव 18 से 40 साल का कोई नौजवान रहेगा। अगर उस गांव में 100 घर हैं तो 9 लोगों की कमेटी और 100 से अधिक हैं तो 11 लोगों की कमेटी बनेगी। सरकार इन कमेटी को सीधा पैसा देने जा रही है। ये आप हर महीने बैठक कर के तय करें कि आपको गांव में डोभा खोदना है या तालाब खोदना है। बारिश के आने के पहले कहां चेकडैम बनाना है ताकि बरसात के पानी का उपयोग हो सके। ये सब फैसला आप गांववाले ही करेंगे। हम पैसा सीधा आपको देंगे। इस मॉडल के तहत योजना का 80 फीसदी खर्च सरकार देगी बाकी का 20 फीसदी गांववाले श्रम दान के रूप में इक्कठा करें। ‘अपना गांव, अपना काम’ के तहत काम करें।

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