Print Friendly, PDF & Email

इस समय सियासी मैदान में दलित केंद्र में हैं और जब से दलितों ने बड़ा प्रदर्शन किया तब से वे सब राजनेताओं के निशाने पर है और जाहिर है हर कोई अपनी सियासी रोटियाँ सेंकना चाह रहा है, इस क्रम में राहुल गांधी भी पीछे नहीं है। वे दलित वोट अपनी अंटी में करने के लिए उपवास रखने जा रहे हैं।

अन्ना हजारे वैसे तो उपवास रखने के लिए जाने जाते हैं लेकिन अब राहुल भी उसी राह पर हैं।  कर्नाटक चुनाव और अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले दलितों के मुद्दे पर कांग्रेस और बीजेपी ने एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

चूंकि दलित मुद्दे पर सियासत चरम पर है और दोनों ही दल खुद को दलितों का हितैषी बताने में लगे हुए हैं। वहीं, संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण हंगामे की भेंट चढ़ने लेकर भी दोनों पार्टियों में तनातनी जारी है। सत्ता पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे पर इसका ठीकरा फोड़ते नजर आ रहे हैं। इसी कड़ी में बीजेपी और कांग्रेस ने एक दूसरे के खिलाफ ‘उपवास युद्ध’ छेड़ दिया है।

कहा जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी खुद इस विरोध-प्रदर्शन की अगुआई करेंगे। वह बापू की समाधि पर एक दिन का उपवास रखेंगे। कांग्रेस कार्यकर्ता भी एक दिन का उपवास रखेंगे और सभी राज्यों और जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेंगे। दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी भी विपक्ष पर संसद न चलने देने का आरोप लगाते हुए 12 अप्रैल को अपने सांसदों द्वारा उपवास की घोषणा कर चुकी है।

इतना ही नहीं खबर तो यहां तक है कि राहुल दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ विरोध प्रदर्शन करेंगे। कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार ने संसद नहीं चलने दी।

जिस वजह से सीबीएसई पेपर लीक, पीएनबी घोटाला, कावेरी मुद्दा और आंध्र प्रदेश के लिए विशेष दर्जे जैसे तमाम अहम मुद्दे सदन में नहीं उठाए जा सके। उपवास के दौरान कांग्रेस एससी/एसटी ऐक्ट में कथित ढील दिए जाने से जुड़े मुद्दे, किसानों की बदहाली और युवाओं के मोहभंग के मुद्दे भी उठाएगी।

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या उपवास से दलितों का उद्धार हो जाएगा राहुल जी?

इस पोस्ट पर आपकी प्रतिक्रिया ⇓