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नई दिल्ली
सीबीआई के भीतर चल रहे तनातनी के बीच आखिरकार सीबीआई के डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना की छुट्टी कर दी गई है। राकेश अस्थाना के उपर मोईन कुरैशी मामले में घूस लेने का आरोप लगा था, जिसके बाद उन्हें इस मामले में मुख्य आरोपी बनाते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

राकेश अस्थाना ने अपने उपर दर्ज हुए मामले के बाद सीबीआई के डायरेक्टर के खिलाफ घूसखोरी के एक के बाद एक कई आरोप लगाए थे। सीबीआई के शीर्ष दो अधिकारियों के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप के बाद आखिरकार दोनों अधिकारियों को छुट्टी कर दी गई है। इसके साथ ही ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी नागेश्वर राव को सीबीआई का कार्यवाहक मुखिया बनाया गया है। इस बाबत सरकार की ओर से नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है।

(नागेश्वर राव)

इससे पहले सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना की मंगलवार को छुट्टी की गई थी। उनके खिलाफ यह कार्रवाई उस वक्त की गई थी जब उनकी एसआईटी टीम के सदस्य डिप्टी देवेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया गया था। इस गिरफ्तारी के बाद राकेश अस्थाना को उनकी सभी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था।

देवेंद्र कुमार पर आरोप है कि उन्होंने मोईन कुरैशी मामले में राकेश अस्थाना के खिलाफ शिकायत करने वाले सतीश बाबू सना से तीन करोड़ रुपए की उगाही की थी और तथ्यों में फेरबदल किया था। जिसके बाद उन्हें सात दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।

सीबीआई की ओर से मंगलवार को निर्देश जारी किया गया है उसमे कहा गया है कि स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना को तमाम जिम्मेदारियों से तत्काल प्रभाव से मुक्त किया जाता है। आपको बता दें कि सीबीआई में नंबर दो के शीर्ष अधिकारी स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना कई संवेदनशली और हाई प्रोफाइल मामलों की जांच कर रहे थे और इन मामलों की जांच कर रही एसआईटी के मुखिया थे।

इन मामलों में ऑगस्ता वेस्टलैंड, वीवीआईपी हेलीकॉप्टर केस, विजय माल्या केस, कोयला घोटाला से संबंधित केस, रॉबर्ट वाड्रा केस, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुडा के खिलाफ भूमि आवंटन का केस, दयानिधि मारन के खिलाफ केस अहम है।

आपको बता दें कि राकेश अस्थाना गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। घूसखोरी कांड में उनका नाम आने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए सीबीआई पर सवाल खड़ा किया था। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि सीबीआई का इस्तेमाल राजनीतिक बदले के लिए किया जा रहा है। सीबीआई के भीतर चल रहे घमासान के बीच तमाम विपक्षी दलों ने भी सरकार पर निशाना साधा था, जिसके बाद सीबीआई के शीर्ष दो अधिकारियों के खिलाफ इस कार्रवाई को काफी अहम माना जा रहा है।

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