Tuesday, October 23, 2018

स्वच्छताग्रहियों के हत्थे चढ़ गए बापू (व्यंग्य)

मेरे बापू भी देश के बापू की तरह प्रयोगधर्मी थे। वे भी परिवार के लिए तरह तरह के प्रयोग किया करते थे। पर उनके...

कस्तूरी कुंडल बसै… (व्यंग्य)- इष्ट देव सांकृत्यायन

पता नहीं, भ्रष्टाचार जी ने कुछ लोगों का क्या बिगाड़ा है जो वे आए दिन उनके पीछे ही पड़े रहते हैं। कभी धरना दे...

अश्लील (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

शहर में ऐसा शोर था कि अश्‍लील साहित्‍य का बहुत प्रचार हो रहा है। अखबारों में समाचार और नागरिकों के पत्र छपते कि सड़कों...

लीडर-लाला (व्यंग्य)- हरिशंकर शर्मा

 एक खास किस्म का समझदार जंतु होता है, जो हर मुल्क और मिल्लत में पाया जाता है। उसे कौम के सर पर सवार होना...

घनचक्कर (व्यंग्य)- विवेकी राय

कचहरी में बैठकर वह लगभग रो दिया था। ऐसा मामूली कार्य भी वह नहीं कर सकता? छोटे-छोटे आदमियों से असफल सिफारिश की खिन्‍नता लिए...

सावधान! मैं किताब लिख रहा हूँ (व्यंग्य)- संजय जोशी “सजग”

ऋषभ जी एक चिंतक और लेखक हैं। इस क्षेत्र में थोड़ा बहुत उनका नाम भी है और पेशे से अध्यापक जो हैं, अपने कार्यस्थल...

प्लीज, जल्दी सजेस्ट कीजिए (व्यंग्य)

उन्होंने अबके दशहरे में जलाने को रावण का आधा पौना पुतला तैयार किया और मेरे घर मेरी कस्टडी में इसलिए छोड़ गए कि मैं...

गरीबी पर एक गंभीर चर्चा (व्यंग्य)- अर्चना चतुर्वेदी

विश्वास मानिए जितना हमारा देश बड़ा है, हमारे देशवाशियों का दिल उससे भी बहुत बड़ा है। उस बड़े दिल में गरीबों की चिंता भरी...

शोकसभा के विविध आयाम (व्यंग्य) : सुशील सिद्धार्थ

मेरे सामने अजीब संकट आ गया है। इसे धर्मसंकट की तर्ज़ पर शोकसंकट कहना ही उचित है। मुझे किसी न किसी बहाने इस शोक...

पंच महाराज (व्यंग्य )- बालकृष्ण भट्ट

माथे पर तिलक, पाँव में बूट चपकन और पायजामा के एवज में कोट और पैंट पहने हुए पंच जी को आते देख मैं बड़े...