Tuesday, December 11, 2018

शेर की गुफा में न्याय (व्यंग्य)- शरद जोशी

जंगल में शेर के उत्पात बहुत बढ़ गए थे। जीवन असुरक्षित था और बेहिसाब मौतें हो रही थीं। शेर कहीं भी, किसी पर हमला...

प्लीज, जल्दी सजेस्ट कीजिए (व्यंग्य)

उन्होंने अबके दशहरे में जलाने को रावण का आधा पौना पुतला तैयार किया और मेरे घर मेरी कस्टडी में इसलिए छोड़ गए कि मैं...

अंधा बांटे रेवड़ी (व्यंग्य)- अरविंद कुमार खेड़े

'अंधा बाँटे रेवड़ी, अपने अपने को...' यह मुहावरा है लोकोक्ति? यह गुणी ज्ञानी-जनों का विषय है। मेरी समस्या दूसरी है। क्यों कि मैं गुणी-ज्ञानी...

लूट इंडिया लूट (व्यंग्य)- शशिकांत सिंह ‘शशि’

दोस्तों! 'लूट इंडिया लूट', रियलिटी शो के इतिहास में मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। आज तक हम टीवी पर केवल मनोरंजन...

सावधान! मैं किताब लिख रहा हूँ (व्यंग्य)- संजय जोशी “सजग”

ऋषभ जी एक चिंतक और लेखक हैं। इस क्षेत्र में थोड़ा बहुत उनका नाम भी है और पेशे से अध्यापक जो हैं, अपने कार्यस्थल...

वसूली करना अपुन से सीखो (व्यंग्य)- अर्चना चतुर्वेदी

हमारे देशवासियों की आदतें और सोच सारी दुनिया से निराली है। जैसे पूरे पर्वत पर संजीवनी बूटी चमकती थी ऐसे हम पूरी दुनिया में...

कीचड़ महिमा न्यारी (व्यंग्य) – गोविंद सेन

मैं अक्सर कीचड़ चिंतन में डूबा रहता हूँ। इससे मुझे बहुत राहत मिलती है। यह मेरी थैरेपी है। जब मैं कीचड़ चिंतन में डूबता...

पाकिस्तान समुंदर-ए-कुफ्र में एक रोशन जजीरा है (व्यंग्य)- पतरस बुखारी

यहां के लोग कुदरत की तमाम नेमतों से अरास्ता हैं। खूबसूरत झीलें, खुले मैदान, धूल, मिट्टी, शोर-ओ-गुल, सब इफरात से पाए जाते हैं। कोयला...

लीडर-लाला (व्यंग्य)- हरिशंकर शर्मा

 एक खास किस्म का समझदार जंतु होता है, जो हर मुल्क और मिल्लत में पाया जाता है। उसे कौम के सर पर सवार होना...

स्वच्छताग्रहियों के हत्थे चढ़ गए बापू (व्यंग्य)

मेरे बापू भी देश के बापू की तरह प्रयोगधर्मी थे। वे भी परिवार के लिए तरह तरह के प्रयोग किया करते थे। पर उनके...