Tuesday, December 11, 2018

स्वच्छताग्रहियों के हत्थे चढ़ गए बापू (व्यंग्य)

मेरे बापू भी देश के बापू की तरह प्रयोगधर्मी थे। वे भी परिवार के लिए तरह तरह के प्रयोग किया करते थे। पर उनके...

क्रांतिकारी की कथा (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

‘क्रांतिकारी’ उसने उपनाम रखा था। खूब पढ़ा-लिखा युवक। स्वस्थ, सुंदर। नौकरी भी अच्छी। विद्रोही। मार्क्स-लेनिन के उद्धरण देता, चे-ग्वेवारा का खास भक्त। कॉफी हाउस में...

अपील का जादू (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

एक देश है! गणतंत्र है! समस्याओं को इस देश में झाड़-फूँक, टोना-टोटका से हल किया जाता है! गणतंत्र जब कुछ चरमराने लगता है, तो...

व्यंग्य- संस्कृति- हरिशंकर परसाई

भूखा आदमी सड़क किनारे कराह रहा था। एक दयालु आदमी रोटी लेकर उसके पास पहुंचा और उसे दे ही रहा था कि एक दूसरे...

चिकित्सा का चक्कर (व्यंग्य)- बेढब बनारसी

मैं बिलकुल हट्टा-कट्टा हूँ। देखने में मुझे कोई भला आदमी रोगी नहीं कह सकता। पर मेरी कहानी किसी भारतीय विधवा से कम करुण नहीं...

अश्लील (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

शहर में ऐसा शोर था कि अश्‍लील साहित्‍य का बहुत प्रचार हो रहा है। अखबारों में समाचार और नागरिकों के पत्र छपते कि सड़कों...

पाकिस्तान समुंदर-ए-कुफ्र में एक रोशन जजीरा है (व्यंग्य)- पतरस बुखारी

यहां के लोग कुदरत की तमाम नेमतों से अरास्ता हैं। खूबसूरत झीलें, खुले मैदान, धूल, मिट्टी, शोर-ओ-गुल, सब इफरात से पाए जाते हैं। कोयला...

लूट इंडिया लूट (व्यंग्य)- शशिकांत सिंह ‘शशि’

दोस्तों! 'लूट इंडिया लूट', रियलिटी शो के इतिहास में मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। आज तक हम टीवी पर केवल मनोरंजन...

आलस्य-भक्त (व्यंग्य)- गुलाब राय

अजगर करै न चाकरी, पंछी करे न काम।      दास मलूका कह गए, सबके दाता राम ।। प्रिय ठलुआ-वृंद! यद्यपि हमारी सभा समता के पहियों पर...

पंच महाराज (व्यंग्य )- बालकृष्ण भट्ट

माथे पर तिलक, पाँव में बूट चपकन और पायजामा के एवज में कोट और पैंट पहने हुए पंच जी को आते देख मैं बड़े...