Tuesday, December 11, 2018

आकाश से गोलियों की बौछार (कविता)- बोरीस स्‍कीस्‍लूत्‍

आकाश से गोलियों की बौछार की तरह तालुओं को जला रही है वोदका आँखों से टपकते हैं तारे जैसे गिर रहे हों बादलों के बीच से और...

एक औरत का चेहरा (कविता)- अडोनिस

मैं एक औरत के चेहरे में रहता हूँ जो एक लहर में रहता है जिसे उछाल दिया है ज्वार ने उस किनारे पर खो दिया है जिसने...

अश्लीलता, आत्मा की (कविता)- आंद्रेइ वोज्नेसेन्स्की 

अपने नग्न प्रशंसक के साथ नाच रही है सबके सामने प्रेमिका। खुश हो ले, ओ शरीर की अश्लीलता कि आत्मा भी प्रदर्शित करती है अपनी अश्लीलता! कला जगत...

अमेरिका मुझे क्यों पसंद नहीं है (व्यंग्य)- हरि जोशी

मुझे अमेरिका क्यों पसंद नहीं। सबसे बड़ा कारण तो यह है कि वहां थूकने की स्वाधीनता बिलकुल नहीं है। मुझे आश्चर्य है, वह कैसा...

मार्खेज को डिमेंशिया हो गया है (कविता)- अंशु मालवीय

मार्खेज को डिमेंशिया हो गया है। जीवन की उत्ताल तरंगों के बीच गिर-गिर पड़ते हैं स्मृति की नौका से बिछल-बिछलकर; फिर भरसक-भरजाँगर कोशिश कर बमुश्किल तमाम चढ़ पाते हैं...

हमारी अर्थी शाही हो नहीं सकती (कविता)- अनुज लुगुन

हमारे सपनों में रहा है एक जोड़ी बैल से हल जोतते हुए खेतों के सम्मान को बनाए रखना हमारे सपनों में रहा है कोइल नदी के किनारे एक...

कहानी – एक पाठक – मक्सिम गोर्की

रात काफी हो गयी थी जब मैं उस घर से विदा हुआ जहाँ मित्रों की एक गोष्ठी में अपनी प्रकाशित कहानियों में से एक...

घास की पुस्तक (कविता)- अर्सेनी तर्कोव्‍स्‍की

अरे नहीं, मैं नगर नहीं हूँ नदी किनारे कोई क्रेमलिन लिये मैं तो नगर का राजचिह्न हूँ।   राजचिह्न भी नहीं मैं उसके ऊपर अंकित तारा मात्र हूँ, रात...

जिंदा रहना चाहता है इंसान (कविता)- बोरीस स्लूत्स्की

जिंदा रहना चाहता है जिंदा इंसान। जिंदा रहना चाहता है मौत तक और उसके बाद भी। मौत को स्थगित रखना चाहता है मरने तक निर्लज्ज हो चाहता...