Friday, October 19, 2018

विलुप्त हो रहे प्राणी (कविता)- आंद्रेइ वोज्नेसेन्स्की

विलुप्त हो रहे सभी प्राणियों का विवरण लिख दिया गया है मेरी श्वेत पुस्तिका में। चिंताजनक हैं ये कुछ लक्षण कि पहले तो वर्ष भर के लिए फिर...

घास की पुस्तक (कविता)- अर्सेनी तर्कोव्‍स्‍की

अरे नहीं, मैं नगर नहीं हूँ नदी किनारे कोई क्रेमलिन लिये मैं तो नगर का राजचिह्न हूँ।   राजचिह्न भी नहीं मैं उसके ऊपर अंकित तारा मात्र हूँ, रात...

युद्ध के मालिक (कविता)- बॉब डिलन

आओ युद्ध के मालिकों तुमने ही बनाईं सारी बंदूकें तुमने ही बनाए मौत के सारे हवाई जहाज तुमने बम बनाए तुम जो दीवारों के पीछे छिपते हो छिपते फिरते...

जिंदा रहना चाहता है इंसान (कविता)- बोरीस स्लूत्स्की

जिंदा रहना चाहता है जिंदा इंसान। जिंदा रहना चाहता है मौत तक और उसके बाद भी। मौत को स्थगित रखना चाहता है मरने तक निर्लज्ज हो चाहता...

‘ऐट क्रिसमस टाइम्स (क्रिसमस के समय में)’ : एंटन चेखव

कथाकार : एंटन चेखव (मशहूर रूसी लेखक) अनुवाद : प्रेमचंद गांधी ‘मैं क्‍या लिखूं’, येगोर ने कहा और उसने अपनी कलम स्‍याही में डुबो दी। वसीलिसा अपनी...

अमेरिका मुझे क्यों पसंद नहीं है (व्यंग्य)- हरि जोशी

मुझे अमेरिका क्यों पसंद नहीं। सबसे बड़ा कारण तो यह है कि वहां थूकने की स्वाधीनता बिलकुल नहीं है। मुझे आश्चर्य है, वह कैसा...

कानून के दरवाजे पर (लोककथा)- फ़्रेंज़ काफ़्का

कानून के द्वार पर रखवाला खड़ा है। उस देश का एक आम आदमी उसके पास आकर कानून के समक्ष पेश होने की इजाजत माँगता...

एक औरत का चेहरा (कविता)- अडोनिस

मैं एक औरत के चेहरे में रहता हूँ जो एक लहर में रहता है जिसे उछाल दिया है ज्वार ने उस किनारे पर खो दिया है जिसने...

आकाश से गोलियों की बौछार (कविता)- बोरीस स्‍कीस्‍लूत्‍

आकाश से गोलियों की बौछार की तरह तालुओं को जला रही है वोदका आँखों से टपकते हैं तारे जैसे गिर रहे हों बादलों के बीच से और...