Sunday, February 25, 2018

हत्या की राजनीति (कहानी)- अनुराग शर्मा

कल तक जिस गाँव में श्मशान सा सन्नाटा छाया हुआ था आज वहाँ कुंभ मेले जैसी गहमागहमी है। लोगों का हुजूम समुद्र की लहरों...

इतवार और तानाशाह (कविता)- मणि मोहन

आज इतवार है अपने घर पर होगा तानाशाह एकदम अकेला... क्या कर रहा होगा ? गमलों में लगे फूलों को डाँट रहा होगा ! हाथों में कैंची लिए लताओं के पर...

सौ-सौ चीते (कविता)- अजय पाठक

बची हुई साँसों पर आगे जाने क्या कुछ बीते एक हिरण पर सौ-सौ चीते। चलें कहाँ तक, राह रोकती सर्वत्र नाकामी कहर मचाती, यहाँ-वहाँ तक फैली सुनामी नीलकंठ हो गए जगत...

जीनियस- (कहानी) – मोहन राकेश

जीनियस कॉफ़ी की प्याली आगे रखे मेरे सामने बैठा था। मैं उस आदमी को ध्यान से देख रहा था। मेरे साथी ने बताया था कि...

अब्बा (संस्मरण) : शबाना आज़मी

पुस्तक अंश : आज के प्रसिद्ध शायर - कैफी आजमी (चुनी हुई शायरी) कै़फ़ी आज़मी एक व्यक्ति न होकर एक पूरा युग हैं और उनके...
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