Monday, November 19, 2018

‘ऐट क्रिसमस टाइम्स (क्रिसमस के समय में)’ : एंटन चेखव

कथाकार : एंटन चेखव (मशहूर रूसी लेखक) अनुवाद : प्रेमचंद गांधी ‘मैं क्‍या लिखूं’, येगोर ने कहा और उसने अपनी कलम स्‍याही में डुबो दी। वसीलिसा अपनी...

सिपाही की माँ (नाटक)- मोहन राकेश

देहात के घर का आँगन, अँधेरा और सीलदार आँगन के बीचोबीच एक खस्ताहाल चारपाई पड़ी है। एक और वैसी ही चारपाई दीवार के साथ...

मार्खेज को डिमेंशिया हो गया है (कविता)- अंशु मालवीय

मार्खेज को डिमेंशिया हो गया है। जीवन की उत्ताल तरंगों के बीच गिर-गिर पड़ते हैं स्मृति की नौका से बिछल-बिछलकर; फिर भरसक-भरजाँगर कोशिश कर बमुश्किल तमाम चढ़ पाते हैं...

सत्य कोयले की खदान में लगी आग है (कविता)- बाबुषा कोहली

मैं कहती हूँ किसी इश्तहार का क्या अर्थ बाकी है कि जब हर कोई चेसबोर्ड पर ही रेंग रहा है आड़ी-टेढ़ी या ढाई घर चालें तो...

टैगोर और अंधी औरतें (कविता)- बोधिसत्व

बरस रहा था देर से पानी भीगने से बचने के लिए मैं रुका था दक्षिण कलकत्ता में एक पेड़ के नीचे, वहीं आए पानी से बचते-बचाते परिमलेंदु बाबू। परिमलेंदु बाबू टैगोर...

कोलकाता लघु पुस्तक मेला में कविता उत्सव का आयोजन किया गया

कोलकाता, रविन्द्र अकोकुरा भवन परिसर में आयोजित लिटिल मैगजीन मेले में मरुतृण साहित्य पत्रिका, सदीनामा साहित्य पत्रिका, साहित्य त्रिवेणी साहित्य पत्रिका एवं विनिर्माण (बंगला)...

मीडिया विमर्श (कविता)- मंगलेश डबराल

उन दिनों जब देश में एक नई तरह का बँटवारा हो रहा था काला और काला और सफेद और सफेद हो रहा था एक तरफ लोग...

आम आदमी (लघु कथा)- शंकर पुणतांबेकर 

नाव चली जा रही थी। मँझदार में नाविक ने कहा, 'नाव में बोझ ज्यादा है, कोई एक आदमी कम हो जाए तो अच्छा, नहीं तो...

रीढ़ की हड्डी (नाटक)- जगदीशचंद्र माथुर

उमा : लड़की रामस्‍वरूप : लड़की का पिता प्रेमा : लड़की की माँ शंकर : लड़का गोपालप्रसाद : लड़के का बाप रतन : नौकर बाबू : अबे, धीरे-धीरे चल!... अब...

आंबेडकर ( कविता)- बिपिन गोहिल

पाँच हजार साल बाद इन अँधेरी गलियों में अभी-अभी सूरज की कुछ किरणें फैलीं उजाला हुआ पल में गिरे हैं कुछ खंडहर अभी अभी जमीं में गाड़ दिया था जिन्हें वे सर...