Monday, November 19, 2018

जीनियस- (कहानी) – मोहन राकेश

जीनियस कॉफ़ी की प्याली आगे रखे मेरे सामने बैठा था। मैं उस आदमी को ध्यान से देख रहा था। मेरे साथी ने बताया था कि...

कोलकाता लघु पुस्तक मेला में कविता उत्सव का आयोजन किया गया

कोलकाता, रविन्द्र अकोकुरा भवन परिसर में आयोजित लिटिल मैगजीन मेले में मरुतृण साहित्य पत्रिका, सदीनामा साहित्य पत्रिका, साहित्य त्रिवेणी साहित्य पत्रिका एवं विनिर्माण (बंगला)...

कहानी: कितने पाकिस्तान- कमलेश्वर -भाग 1

कितना लम्बा सफर है! और यह भी समझ नहीं आता कि यह पाकिस्तान बार-बार आड़े क्यों आता रहा है। सलीमा! मैंने कुछ बिगाड़ा तो...

दीपक चौरसिया की ‘कूड़ा धन’ पढ़ने के लिए तैयार हैं आप?

टेलीविजन सनसनी एवं मीडिया के क्षेत्र में अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करने के लिए पहचाने जाने वाले दीपक चौरसिया अपनी पहली किताब...

आदिवासी औरत रोती है (कविता)- महेश वर्मा

आदिवासी औरत रोती है गुफाकालीन लय में। इसमें जंगल की आवाज़ें हैं और पहाड़ी झरने के गिरने की आवाज़, इसमें शिकार पर निकलने से पहले जानवर...

विश्व पुस्तक मेले के विविध रंग

एनबीटी ने आकाशवाणी साहित्य संपदा के तीन खंडों का किया लोकार्पण थीम मंडप में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा प्रकाशित आकाशवाणी साहित्य संपदा के तीन खंडों...

हम लड़ेंगे साथी : पाश

हम लड़ेंगे साथी, उदास मौसम के लिए हम लड़ेंगे साथी, ग़ुलाम इच्छाओं के लिए हम चुनेंगे साथी, ज़िन्दगी के टुकड़े हथौड़ा अब भी चलता है, उदास निहाई...

आर्ट का पुल (कहानी) -फ़हीम आज़मी

पहले तो सारा इलाका एक ही था और उसका नाम भी एक ही था। इलाका बहुत उपजाऊ था। बहुत से बाग, खेत, जंगली पौधे,...

किताब… यानी उफनते खयालों का समंदर

दुकान किताब की / महज इक दुकान नहीं, जमा है इसमें समंदर / उफनते खयालों का… युवा शायर सतेन्द्र ‘मनम’ का यह शे’र वाणी प्रकाशन...

तुम्हारे साथ रहकर (कविता) : सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

तुम्हारे साथ रहकर अक्सर मुझे ऐसा महसूस हुआ है कि दिशाएँ पास आ गयी हैं, हर रास्ता छोटा हो गया है, दुनिया सिमटकर एक आँगन-सी बन गयी है जो खचाखच...