Monday, October 22, 2018

बू (कहानी) : सआदत हसन मंटो

बरसात के यही दिन थे। खिड़की के बाहर पीपल के पत्ते इसी तरह नहा रहे थे सागवन के स्प्रिन्गदार पलंग पर, जो अब खिड़की...

लूट इंडिया लूट (व्यंग्य)- शशिकांत सिंह ‘शशि’

दोस्तों! 'लूट इंडिया लूट', रियलिटी शो के इतिहास में मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। आज तक हम टीवी पर केवल मनोरंजन...

द रॉयल घोस्ट (कहानी)- तरुण भटनागर

'...चल-चल आज तो दिखा ही दे, क्या है उस ट्रंक में। मान जा यार।' पिता बिट्टो बुआ से निवेदन कर रहे थे। बिट्टो बुआ को...

अनोखी तरकीब (बाल-कहानी)

  ⇒ पराग ज्ञानदेव चौधरी बहुत पुरानी बात है। एक अमीर व्यापारी के यहाँ चोरी हो गयी। बहुत तलाश करने के बावजूद सामान न मिला और न...

कहानी: कितने पाकिस्तान-  कमलेश्वर -भाग 2

गतांक से आगे ...... मैं जब भिवंडी पहुंचा तो दंगा खत्म हुए दस-बारह दिन हो चुके थे। घुसते ही बस्ती में जगह-जगह काले चकते दिखाई...

देश-द्रोह (कहानी)- पांडेय बेचन शर्मा उग्र

17 नवंबर, सन 1845 ई. की बात है। मारे सर्दी के निशा-सुंदरी काँप रही थी, और काँप रहा था उसी के साथ संपूर्ण पंजाब-प्रदेश।...

‘ऐट क्रिसमस टाइम्स (क्रिसमस के समय में)’ : एंटन चेखव

कथाकार : एंटन चेखव (मशहूर रूसी लेखक) अनुवाद : प्रेमचंद गांधी ‘मैं क्‍या लिखूं’, येगोर ने कहा और उसने अपनी कलम स्‍याही में डुबो दी। वसीलिसा अपनी...

मुंडन- हरिशंकर परसाई

किसी देश की संसद में एक दिन बड़ी हलचल मची। हलचल का कारण कोई राजनीतिक समस्या नहीं थी, बल्कि यह था कि एक मंत्री...

कहानी: कितने पाकिस्तान- कमलेश्वर -भाग 1

कितना लम्बा सफर है! और यह भी समझ नहीं आता कि यह पाकिस्तान बार-बार आड़े क्यों आता रहा है। सलीमा! मैंने कुछ बिगाड़ा तो...

केयर ऑफ स्वात घाटी (कहानी) – मनीषा कुलश्रेष्ठ

''यह मेरी अस्मिता का प्रश्न है...विद्वता का अभिमान नहीं है मुझे। ज्ञान पर विश्वास अवश्य है। सब कहें तो कहें कि वाचकनु के ॠषिकुल...