Friday, February 23, 2018

बेख़बरी का फ़ायदा (लघुकथा)- सआदत हसन मंटो

लबलबी दबी – पिस्तौल से झुँझलाकर गोली बाहर निकली. खिड़की में से बाहर झाँकनेवाला आदमी उसी जगह दोहरा हो गया. लबलबी थोड़ी देर बाद फ़िर...

देश-द्रोह (कहानी)- पांडेय बेचन शर्मा उग्र

17 नवंबर, सन 1845 ई. की बात है। मारे सर्दी के निशा-सुंदरी काँप रही थी, और काँप रहा था उसी के साथ संपूर्ण पंजाब-प्रदेश।...

नंगी तस्वीरें (कहानी) : देवेन्द्र इस्सर

बाहर भी अँधेरा था और भीतर भी, अन्धकार अपने काले पंख फैलाये चारों ओर मंडरा रहा था। अपरिमित जन-समूह का अनन्त प्रवाह हाथों में...

दिल्ली में एक मौत (कहानी ) – कमलेश्वर

मैं चुपचाप खड़ा सब देख रहा हूँ और अब न जाने क्यों मुझे मन में लग रहा है कि दीवानचंद की शवयात्रा में कम...

हिन्दुस्तान छोड़ दो (कहानी) – इस्मत चुग़तई

'साहब मर गया जयंतराम ने बाजार से लाए हुए सौदे के साथ यह खबर लाकर दी। 'साहब- कौन साहब? 'वह कांटरिया साहब था न? 'वह काना साहब-...

कहानी – एक पाठक – मक्सिम गोर्की

रात काफी हो गयी थी जब मैं उस घर से विदा हुआ जहाँ मित्रों की एक गोष्ठी में अपनी प्रकाशित कहानियों में से एक...

कहानी: कितने पाकिस्तान-  कमलेश्वर -भाग 2

गतांक से आगे ...... मैं जब भिवंडी पहुंचा तो दंगा खत्म हुए दस-बारह दिन हो चुके थे। घुसते ही बस्ती में जगह-जगह काले चकते दिखाई...

कहानी: कितने पाकिस्तान- कमलेश्वर -भाग 1

कितना लम्बा सफर है! और यह भी समझ नहीं आता कि यह पाकिस्तान बार-बार आड़े क्यों आता रहा है। सलीमा! मैंने कुछ बिगाड़ा तो...

कहानी : ठंडा गोश्त – सआदत हसन मंटो

ईश्वरसिंह ज्यों ही होटल के कमरे में दांखिला हुआ, कुलवन्त कौर पलंग पर से उठी। अपनी तेज-तेज आँखों से उसकी तरफ घूरकर देखा और...
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