Monday, October 22, 2018

मार्केट वैल्यू (कविता)- अनवर सुहैल

जो है जैसा भी है ग्राह्य नही किसी को... दिखे नहीं सो बिके नहीं अब बिके नहीं तो कौन पुछवैया... चाल बदलकर, ढाल बदलकर घड़ी-घड़ी में भेष बदलकर चकमा देने वाले...

आदिवासी औरत रोती है (कविता)- महेश वर्मा

आदिवासी औरत रोती है गुफाकालीन लय में। इसमें जंगल की आवाज़ें हैं और पहाड़ी झरने के गिरने की आवाज़, इसमें शिकार पर निकलने से पहले जानवर...

हम लड़ेंगे साथी : पाश

हम लड़ेंगे साथी, उदास मौसम के लिए हम लड़ेंगे साथी, ग़ुलाम इच्छाओं के लिए हम चुनेंगे साथी, ज़िन्दगी के टुकड़े हथौड़ा अब भी चलता है, उदास निहाई...

तुम्हारे साथ रहकर (कविता) : सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

तुम्हारे साथ रहकर अक्सर मुझे ऐसा महसूस हुआ है कि दिशाएँ पास आ गयी हैं, हर रास्ता छोटा हो गया है, दुनिया सिमटकर एक आँगन-सी बन गयी है जो खचाखच...

आंबेडकर ( कविता)- बिपिन गोहिल

पाँच हजार साल बाद इन अँधेरी गलियों में अभी-अभी सूरज की कुछ किरणें फैलीं उजाला हुआ पल में गिरे हैं कुछ खंडहर अभी अभी जमीं में गाड़ दिया था जिन्हें वे सर...

श्राद्ध का अन्न (कविता)- अरुण कमल

श्राद्ध का अन्न खा लौट रहे तेज कदम दूर गाँव के ग्रामीण जोर जोर से बतियाते व्यंजनों का स्वाद मृतक का आचार व्यवहार लगाते ठहाका भूँकते कुत्तों को...

पाँव जमा है रावण का (कविता)- भगवत दुबे

सम्मानित हो रहे आज वे लहू, गरीबों का जिनने बेखौफ निचोड़ा है। शिलालेख अपने लिखवाते, रहा नहीं आँखों में पानी शोषक शब्द हुआ अनुवादित हरिश्चंद्र के जैसा दानी विध्वंशक पथ पर गांधी,...

अश्लीलता, आत्मा की (कविता)- आंद्रेइ वोज्नेसेन्स्की 

अपने नग्न प्रशंसक के साथ नाच रही है सबके सामने प्रेमिका। खुश हो ले, ओ शरीर की अश्लीलता कि आत्मा भी प्रदर्शित करती है अपनी अश्लीलता! कला जगत...

दलित कवियों की दमदार उपस्थिति दर्ज कराएगी “बिहार-झारखण्ड की चुनिन्दा दलित...

अमूमन ऐसी चर्चा होती है कि दलित रचनाकारों को मुख्यधारा के साहित्यिक पटल पर समुचित स्थान नहीं मिल पाता है। ऐसी ही चिंता को...

वृद्धाएँ धरती की नमक हैं (कविता)- अनामिका)

'कपड़ा है देह', '...जीर्णाणि वस्त्राणि' ...वाला यह श्लोक 'गीता' का, सुना था कभी बहुत बचपन में पापा के पेट पर पट्ट लेटे-लेटे ! संदर्भ यह है कि दादाजी गुजर...