Friday, February 23, 2018

नाक की लौंग (कविता)- मार्तिन हरिदत्त लछमन श्रीनिवासी

कविता के साथ यह शहर रोशनी में आता है। मैं तुमसे वह देखता हूँ जो मुझसे अनजाना और अनभिज्ञ है। गहराई से प्यारा और नाजुक है वासंती हवा के...

गैर-मुल्की लड़की (कहानी)- अल्ताफ़ फ़ातिमा

वह गैर-मुल्की लड़की, जो खीरी जिला लखीमपुर से आयी या यों कहिए कि विवाह के लिए लायी गयी थी, महीनों से यहां पड़ी थी...

मापदंड बदलो (कविता)- दुष्यंत कुमार

मेरी प्रगति या अगति का यह मापदंड बदलो तुम, जुए के पत्ते-सा मैं अभी अनिश्चित हूँ । मुझ पर हर ओर से चोटें पड़ रही हैं, कोपलें उग रही...

अब कल आएगा यमराज (कहानी) – अभिमन्यु अनत

अपने गले में लटके मंगलसूत्र के तमगे को वह अपने अँगूठे और दो अँगुलियों के बीच उलटती-पलटती रही। उसकी सूखी आँखें चारदीवारी की कसमसाती...

मार्केट वैल्यू (कविता)- अनवर सुहैल

जो है जैसा भी है ग्राह्य नही किसी को... दिखे नहीं सो बिके नहीं अब बिके नहीं तो कौन पुछवैया... चाल बदलकर, ढाल बदलकर घड़ी-घड़ी में भेष बदलकर चकमा देने वाले...

असत्य ही सत्य है (व्यंग्य)- राजेंद्र त्यागी

यह गांधी का देश है। 'सत्य अहिंसा परमोधर्म' इस देश का मूलमंत्र है। इस मूलमंत्र का जाप करते हुए हम शत-प्रतिशत गांधी के बताए...

केयर ऑफ स्वात घाटी (कहानी) – मनीषा कुलश्रेष्ठ

''यह मेरी अस्मिता का प्रश्न है...विद्वता का अभिमान नहीं है मुझे। ज्ञान पर विश्वास अवश्य है। सब कहें तो कहें कि वाचकनु के ॠषिकुल...

बेख़बरी का फ़ायदा (लघुकथा)- सआदत हसन मंटो

लबलबी दबी – पिस्तौल से झुँझलाकर गोली बाहर निकली. खिड़की में से बाहर झाँकनेवाला आदमी उसी जगह दोहरा हो गया. लबलबी थोड़ी देर बाद फ़िर...

एक कुत्ते की डायरी (व्यंग्य)- प्रभाकर माचवे

शनिचैव श्वापाके च पंडित: समदर्शिन:। (गीता) मेरा नाम 'टाइगर' है, गो शक्ल-सूरत और रंग-रूप में मेरा किसी भी शेर या 'सिंह' से कोई साम्य नहीं।...

सबै जात गोपाल की -(नाटक)- भारतेंदु हरिश्चंद्र

(एक पंडित जी और एक क्षत्री आते हैं) क्षत्री : महाराज देखिये बड़ा अंधेर हो गया कि ब्राह्मणों ने व्यवस्था दे दी कि कायस्थ भी...
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