Sunday, October 21, 2018

दलित कवियों की दमदार उपस्थिति दर्ज कराएगी “बिहार-झारखण्ड की चुनिन्दा दलित...

अमूमन ऐसी चर्चा होती है कि दलित रचनाकारों को मुख्यधारा के साहित्यिक पटल पर समुचित स्थान नहीं मिल पाता है। ऐसी ही चिंता को...

शोकसभा के विविध आयाम (व्यंग्य) : सुशील सिद्धार्थ

मेरे सामने अजीब संकट आ गया है। इसे धर्मसंकट की तर्ज़ पर शोकसंकट कहना ही उचित है। मुझे किसी न किसी बहाने इस शोक...

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, हिन्दी लेखनी में एक ऐसा नाम जिनसे कोई...

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना हिन्दी साहित्य जगत के एक ऐसे शख्स हैं, जिनकी लेखनी से कोई विधा अछूती नहीं रही। चाहे वह कविता हो, गीत...

मुंडन- हरिशंकर परसाई

किसी देश की संसद में एक दिन बड़ी हलचल मची। हलचल का कारण कोई राजनीतिक समस्या नहीं थी, बल्कि यह था कि एक मंत्री...

अपील का जादू (व्यंग्य) : हरिशंकर परसाई

एक देश है! गणतंत्र है! समस्याओं को इस देश में झाड़-फूँक, टोना-टोटका से हल किया जाता है! गणतंत्र जब कुछ चरमराने लगता है, तो...

ऑक्सफोर्ड में ‘हिन्दी महोत्सव’ के चौथे अध्याय का उद्घाटन

हिन्दी महोत्सव का चौथा अध्याय और यूनाइटेड किंगडम के पहले अध्याय का उद्घाटन 28 जून 2018 को ऑक्सफोर्ड में किया गया। उद्घाटन सत्र में...

कितना अच्छा होता है (कविता) : सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

एक-दूसरे को बिना जाने पास-पास होना और उस संगीत को सुनना जो धमनियों में बजता है, उन रंगों में नहा जाना जो बहुत गहरे चढ़ते-उतरते हैं । शब्दों की खोज...

चिड़ियाघर के तोते (कविता)- बुद्धिनाथ मिश्र

चिड़ियाघर के तोते को है क्या अधिकार नहीं पंख लगे हैं फिर भी उड़ने को तैयार नहीं। धरती और गगन का मिलना एक भुलावा है खर-पतवारों का सारे क्षितिजों पर दावा...

बच्चों को पढ़ाई जाएगी वंदना टेटे की कविता  ‘हम भी जा...

रांची : झारखंड पाठ्य पुस्तक समिति ने कक्षा 7 की हिंदी पुस्तक ‘भाषा मंजरी’ में कवयित्री और सामाजिक कार्यकर्ता वंदना टेटे की कविता ‘हम...

गरीबी पर एक गंभीर चर्चा (व्यंग्य)- अर्चना चतुर्वेदी

विश्वास मानिए जितना हमारा देश बड़ा है, हमारे देशवाशियों का दिल उससे भी बहुत बड़ा है। उस बड़े दिल में गरीबों की चिंता भरी...