Wednesday, August 22, 2018

तुम्हारे साथ रहकर (कविता) : सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

तुम्हारे साथ रहकर अक्सर मुझे ऐसा महसूस हुआ है कि दिशाएँ पास आ गयी हैं, हर रास्ता छोटा हो गया है, दुनिया सिमटकर एक आँगन-सी बन गयी है जो खचाखच...

कस्तूरी कुंडल बसै… (व्यंग्य)- इष्ट देव सांकृत्यायन

पता नहीं, भ्रष्टाचार जी ने कुछ लोगों का क्या बिगाड़ा है जो वे आए दिन उनके पीछे ही पड़े रहते हैं। कभी धरना दे...

सिपाही की माँ (नाटक)- मोहन राकेश

देहात के घर का आँगन, अँधेरा और सीलदार आँगन के बीचोबीच एक खस्ताहाल चारपाई पड़ी है। एक और वैसी ही चारपाई दीवार के साथ...

संगीत और साहित्यिक कार्यों के लिए आईपीआरएस का अमेज़ॅन इंडिया के...

अमेज़ॅन इंडिया की हाल ही में लॉन्च की गई विज्ञापन मुक्त संगीत लहराने वाली सेवा, अमेज़ॅन प्राइम म्यूज़िक, कई भाषाओं,युगों और भारतीय संगीत की...
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