Sunday, December 16, 2018

वृद्धाएँ धरती की नमक हैं (कविता)- अनामिका)

'कपड़ा है देह', '...जीर्णाणि वस्त्राणि' ...वाला यह श्लोक 'गीता' का, सुना था कभी बहुत बचपन में पापा के पेट पर पट्ट लेटे-लेटे ! संदर्भ यह है कि दादाजी गुजर...

वसूली करना अपुन से सीखो (व्यंग्य)- अर्चना चतुर्वेदी

हमारे देशवासियों की आदतें और सोच सारी दुनिया से निराली है। जैसे पूरे पर्वत पर संजीवनी बूटी चमकती थी ऐसे हम पूरी दुनिया में...

अश्लीलता, आत्मा की (कविता)- आंद्रेइ वोज्नेसेन्स्की 

अपने नग्न प्रशंसक के साथ नाच रही है सबके सामने प्रेमिका। खुश हो ले, ओ शरीर की अश्लीलता कि आत्मा भी प्रदर्शित करती है अपनी अश्लीलता! कला जगत...

वंचित तबके के लिए स्टार नाइट में तब्दील हुआ ‘स्माइल इंडिया’...

‘स्माइल इंडिया’ का ‘गिफ्ट ए स्माइल 2018’ कार्यक्रम पिछले दिनों एयरपोर्ट होटल रेडिसन ब्लू में संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम संस्था के सोलह वर्षों के...

विलुप्त हो रहे प्राणी (कविता)- आंद्रेइ वोज्नेसेन्स्की

विलुप्त हो रहे सभी प्राणियों का विवरण लिख दिया गया है मेरी श्वेत पुस्तिका में। चिंताजनक हैं ये कुछ लक्षण कि पहले तो वर्ष भर के लिए फिर...

दर्ज लम्हे : खुदकुशी के (नाटक)- दिनकर बेडेकर

व्यक्ति रेखा : जनक, राजा, मोहिनी ( किसी नाटक की रिहर्सल का कमरा। थोड़ा फर्नीचर जमा कर रखा है। एक दरवाजा। प्रकाश योजना केवल आवश्यक...

घास की पुस्तक (कविता)- अर्सेनी तर्कोव्‍स्‍की

अरे नहीं, मैं नगर नहीं हूँ नदी किनारे कोई क्रेमलिन लिये मैं तो नगर का राजचिह्न हूँ।   राजचिह्न भी नहीं मैं उसके ऊपर अंकित तारा मात्र हूँ, रात...

गोडसे पर आधारित नाटक में बवाल, बीएचयू की इजाजत पर जांच...

एक नाटक को लेकर काफी बवाल हो रहा है, नाटक भी ऐसा जो सुनने में ही विवादास्पद लगता है। दरअसल काशी हिंदू विश्वविद्यालय( बीएचयू)...

तुम्हारे साथ रहकर (कविता) : सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

तुम्हारे साथ रहकर अक्सर मुझे ऐसा महसूस हुआ है कि दिशाएँ पास आ गयी हैं, हर रास्ता छोटा हो गया है, दुनिया सिमटकर एक आँगन-सी बन गयी है जो खचाखच...

कस्तूरी कुंडल बसै… (व्यंग्य)- इष्ट देव सांकृत्यायन

पता नहीं, भ्रष्टाचार जी ने कुछ लोगों का क्या बिगाड़ा है जो वे आए दिन उनके पीछे ही पड़े रहते हैं। कभी धरना दे...