Sunday, November 18, 2018
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पुस्तक मेला

    दर्ज लम्हे : खुदकुशी के (नाटक)- दिनकर बेडेकर

    व्यक्ति रेखा : जनक, राजा, मोहिनी ( किसी नाटक की रिहर्सल का कमरा। थोड़ा फर्नीचर जमा कर रखा है। एक दरवाजा। प्रकाश योजना केवल आवश्यक...

    घास की पुस्तक (कविता)- अर्सेनी तर्कोव्‍स्‍की

    अरे नहीं, मैं नगर नहीं हूँ नदी किनारे कोई क्रेमलिन लिये मैं तो नगर का राजचिह्न हूँ।   राजचिह्न भी नहीं मैं उसके ऊपर अंकित तारा मात्र हूँ, रात...

    कस्तूरी कुंडल बसै… (व्यंग्य)- इष्ट देव सांकृत्यायन

    पता नहीं, भ्रष्टाचार जी ने कुछ लोगों का क्या बिगाड़ा है जो वे आए दिन उनके पीछे ही पड़े रहते हैं। कभी धरना दे...

    सियासी माहौल में विमोचन हुआ दीपक चौरसिया की पहली किताब ‘कूड़ा...

    वरिष्ठ पत्रकार और इंडिया न्यूज चैनल के एडिटर-इन-चीफ दीपक चौरसिया की पहली किताब 'कूड़ा धन' का मंगलवार की शाम कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में विमोचन हुआ....

    अंधा बांटे रेवड़ी (व्यंग्य)- अरविंद कुमार खेड़े

    'अंधा बाँटे रेवड़ी, अपने अपने को...' यह मुहावरा है लोकोक्ति? यह गुणी ज्ञानी-जनों का विषय है। मेरी समस्या दूसरी है। क्यों कि मैं गुणी-ज्ञानी...

    दीपक चौरसिया की ‘कूड़ा धन’ पढ़ने के लिए तैयार हैं आप?

    टेलीविजन सनसनी एवं मीडिया के क्षेत्र में अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करने के लिए पहचाने जाने वाले दीपक चौरसिया अपनी पहली किताब...

    लूट इंडिया लूट (व्यंग्य)- शशिकांत सिंह ‘शशि’

    दोस्तों! 'लूट इंडिया लूट', रियलिटी शो के इतिहास में मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। आज तक हम टीवी पर केवल मनोरंजन...

    श्राद्ध का अन्न (कविता)- अरुण कमल

    श्राद्ध का अन्न खा लौट रहे तेज कदम दूर गाँव के ग्रामीण जोर जोर से बतियाते व्यंजनों का स्वाद मृतक का आचार व्यवहार लगाते ठहाका भूँकते कुत्तों को...

    अजनबी देश है यह (कविता) -सर्वेश्वरदयाल सक्सेना

    अजनबी देश है यह, जी यहाँ घबराता है कोई आता है यहाँ पर न कोई जाता है जागिए तो यहाँ मिलती नहीं आहट कोई, नींद में जैसे...

    इतवार और तानाशाह (कविता)- मणि मोहन

    आज इतवार है अपने घर पर होगा तानाशाह एकदम अकेला... क्या कर रहा होगा ? गमलों में लगे फूलों को डाँट रहा होगा ! हाथों में कैंची लिए लताओं के पर...