Thursday, July 19, 2018
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किताब की बात

किताब… यानी उफनते खयालों का समंदर

दुकान किताब की / महज इक दुकान नहीं, जमा है इसमें समंदर / उफनते खयालों का… युवा शायर सतेन्द्र ‘मनम’ का यह शे’र वाणी प्रकाशन...

जब गांगुली ने सहवाग को सरेआम डांट पिलाई, जाने क्यों?

कई बार डांट मीठी होती और आपका भविष्य भी बना देती है, कई बार डांट से दिल दुःख जाता है लेकिन वीरेंद्र सहवाग जको...

सत्य कोयले की खदान में लगी आग है (कविता)- बाबुषा कोहली

मैं कहती हूँ किसी इश्तहार का क्या अर्थ बाकी है कि जब हर कोई चेसबोर्ड पर ही रेंग रहा है आड़ी-टेढ़ी या ढाई घर चालें तो...

स्कूलों की मनमानी पर कैसे लगे रोक

प्राइवेट व इंग्लिश मीडियम स्कूलों में स्कूल संचालकों द्वारा मनमाने तरीके से छात्र-छात्राओं के फीस, डेªस व किताबें आदि के नाम पर मोटी वसूली...

आर्ट का पुल (कहानी) -फ़हीम आज़मी

पहले तो सारा इलाका एक ही था और उसका नाम भी एक ही था। इलाका बहुत उपजाऊ था। बहुत से बाग, खेत, जंगली पौधे,...

मर्द और औरत (नाटक)- रशीद जहाँ

औरत - अरे फिर आ गये! मर्द - जी हाँ औरत - अभी कल ही तो आप शादी करने गये थे! मर्द - गया तो था! औरत -...

परीक्षा की एवज में वसूली का खेल

सिकंद्राराऊ- कोतवाली क्षेत्र के गांव देवी नगला निवासी व्यक्ति ने एक महाविद्यालय के प्रबंधक समेत चार लोगो के खिलाफ परीक्षा के दौरान वसूली करने...

दर्ज लम्हे : खुदकुशी के (नाटक)- दिनकर बेडेकर

व्यक्ति रेखा : जनक, राजा, मोहिनी ( किसी नाटक की रिहर्सल का कमरा। थोड़ा फर्नीचर जमा कर रखा है। एक दरवाजा। प्रकाश योजना केवल आवश्यक...

घास की पुस्तक (कविता)- अर्सेनी तर्कोव्‍स्‍की

अरे नहीं, मैं नगर नहीं हूँ नदी किनारे कोई क्रेमलिन लिये मैं तो नगर का राजचिह्न हूँ।   राजचिह्न भी नहीं मैं उसके ऊपर अंकित तारा मात्र हूँ, रात...

कस्तूरी कुंडल बसै… (व्यंग्य)- इष्ट देव सांकृत्यायन

पता नहीं, भ्रष्टाचार जी ने कुछ लोगों का क्या बिगाड़ा है जो वे आए दिन उनके पीछे ही पड़े रहते हैं। कभी धरना दे...
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