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उ.प्र. उद्योग व्यापार मण्डल के जिला अध्यक्ष जगदीश पंकज एवं जिला चेयरमैन राधेश्याम अग्रवाल ने संयुक्त रूप से कहा है कि गुड्स एवं सर्विस टैक्स (जीएसटी) के अन्तर्गत विभाग के अपूर्ण नियम एवं विभाग की कम्प्यूटर प्रणाली को अधिकारी सही रूप से नहीं रखने एवं सरवर सही काम नहीं करने के कारण व्यापारियों को तरह-तरह से आरोप प्रत्यारोप लगाकर सर्वे छापे का भय दिखाकर अपनी अवैध मानसिकता का परिचय दे रहे हैं और इस उत्पीडन को व्यापार मण्डल किसी भी रूप में सहन नहीं करेगा।

उन्होंने कहा है कि विभाग के सम्पूर्ण भारत वर्ष में ई बे बिल प्रणाली को फरवरी माह में प्रारम्भ किया परन्तु विभाग की कम्प्यूटर प्रणाली को अधिकारियों ने ही नहीं चलने दिया उसी का परिणाम रहा कि वह जीएसटी कौसिल को वापिस लेना पडा।

व्यापारी वर्ग केन्द्र सरकार की नोटबंदी से ऊवर नहीं पाया था कि जीएसटी लागू कर दी गई जिसे भी व्यापारी वर्ग ने स्वीकार किया। अब पुनः धीरे-धीरे व्यापार लाइन पर आने का कदम बढा रहा है लेकिन व्यापारियों के प्रति खराब व स्वार्थ पूर्ति नीति के तहत अब वाणिज्य कर के अधिकारी टैक्स कलैक्शन के बहाने के तहत छापे की कार्यवाही करने को आमदा हो रहे हैं जबकि जीएसटी के नियमों में स्पष्ट निर्देश है कि छापे से पूर्व व्यापार कम क्यों हुआ क्या कारण रहा व्यापारी के विरूद्ध कौन-कौन से प्रमाण उन्होंने एकत्रित किये।

पूर्णता जानकारी होने पर ही उच्च अधिकारियों से आदेश प्राप्त करने के पश्चात छापे की कार्यवाही किया जाना आवश्यक होता है।

केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकारें व्यापारियों को व्यापार की अडचनों को दूर कराने की कार्यवाही कर रही है और किसी भी प्रकार से व्यापारियों का उत्पीडन न हो इसके लिये कृत संकल्पित है वही अधिकारियों की मानसिकता इसके विपरीत है।

अभी कुछ दिन पूर्व शहर हाथरस में दो व्यापारियों के यहां बिना ठोस तथ्य के गलत छापेमारी की गई जबकि दोनों व्यापारियों के कारोबार के टर्न ओवर काफी अधिक है और कर भी पूर्व वर्षो से दोगुना से अधिक जमा कराया गया है फिर भी छापे का भय दिखाया जाना स्पष्ठतः सरकार के अधिकारियों की मानसिकता को दर्शाता है।

जनप्रतिनिधि सांसद एवं सभी विधायकों से मांग की जाती है कि वह वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों की मानसिकता को देखें परखें व अनैतिक कार्यो के प्रति उन्हें उचित मार्ग दर्शित करें।

यदि व्यापारियों का उत्पीडन जारी रहा तो हम शांत नहीं बैठेंगे। विभाग के विरूद्ध एवं गलत मंतव्य से की गई कार्यवाही का पुरजोर विरोध करने से पीछे नहीं रहेंगे।

समर्थन करने वालों में सुरेशचन्द्र आंधीवाल, हरीश अग्रवाल, रघुनाथ टालीवाल, विष्णु पचैरी, मनोज अग्रवाल, कैलाशचन्द्र अग्रवाल, नन्नूमल गुप्ता, विष्णु गौतम, अनिल वाष्र्णेय, गिर्राज किशोर नीरज, प्रदीप बंसल, विपन अग्रवाल, मदनलाल माहेश्वरी, लाला बाबू वाष्र्णेय, विष्णु प्रकाश वाष्र्णेय, विनोद बंसल, सुरेन्द्र वाष्र्णेय, विकास गर्ग, मनोज बंसल, ऋषि शर्मा, रघुकुल तिलक दुबे, निरंजन कुमार वर्मा, सुनील वर्मा, विपुल सिंघानियां, नरेश वर्मा, अजय कुमार वाष्र्णेय, संजीव आंधीवाल आदि हैं।

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