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बजट को लेकर पूरे देश की जनता में खासा उत्साह था कि शायद सरकार उनकी फटी और कमजोर जेब कोई न कोई इलाज बजट के जरिये कर ही देगी। लेकिन जब सुबह 11 बजे वित्त मंत्री संसद भवन पहुंचे औऱ उसके बाद हिंगलिश वर्जन में बजट पेश करना शुरू किया अबकी उम्मीदें धुंधलाने लगीं।

हर साल की तरह मिडिल क्लास के हाथ कुछ नहीं लगा तो वहीं टैक्स स्लैब भी कोई राहत नहीं दे सका। किसानों के नाम जरूर कुछ बड़ी घोषणाएं हुईं लेकिन उनमें से कितनी धरातल पर पहुंच पाएंगी, कहना मुश्किल है।
सरकार भले ही बजट को लेकर अपनी पीठ थपथपा रही हो लेकिन इस बार के बजट शो को फ्लॉप शो कहना गलत नहीं होगा।

सरकार ने टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है। हालांकि, स्टैंडर्ड डिडक्शन स्कीम को दोबारा लाया गया है। इस स्कीम के मुताबिक, नौकरीपेशा लोगों को ट्रांसपोर्ट और मेडिकल खर्च के मद में ग्रॉस सैलरी से 40 हजार रुपये घटाकर उस आमदनी पर टैक्स देना होगा।
सरकार ने इनकम टैक्स पर सेस बढ़ाने का भी प्रावधान किया है। वहीं, बुर्जुगों को 80 डी के तहत मिलने वाली मेडिकल क्लेम की सीमा को बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया।

इसके अलावा, सीनियर सिटीजंस को बैंक डिपॉजिट पर ब्याज पर छूट की सीमा को भी बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया।

सरकार ने 25 प्रतिशत कॉरपोरेट टैक्स रेट की छूट को अब 250 करोड़ रेवेन्यू वाली कंपनियों को देने का फैसला किया है। इसके अलावा 100 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाली किसान उत्पादों वाली कंपनियों को टैक्स में 100 प्रतिशत छूट देने की घोषणा की गई है।
इक्विटी ओरिएंटेड म्युचुअल फंड्स से होने वाली कमाई पर 10 प्रतिशत टैक्स लगाने का ऐलान किया गया। मोबाइल फोन पर भी कस्टम ड्यूटी 15 पर्सेंट से बढ़ाकर 20 पर्सेंट करने का ऐलान किया गया है। जेटली ने बताया कि टैक्सदाताओं की संख्या बढ़ रही है, लेकिन रेवेन्यू में इजाफा नहीं हो रहा।

जीएसटी लागू होने के बाद बजट में आइटमों के सस्ते और महंगे होने की बहुत गुंजाइश नहीं थी। पेट्रोल-डीजल और ऐल्कॉहॉल जीएसटी से बाहर थे। ऐसे में कस्टम ड्यूटी घटने या बढ़ने से कुछ आइटमों के दाम महंगे और सस्ते हुए हैं। वित्त मंत्री ने अपने भाषण में बताया कि मोबाइल और टीवी जैसे आइटमों पर सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) 15 पर्सेंट से बढ़ाकर 20 पर्सेंट किया गया है।

वहीं काजू पर कस्टम ड्यूटी 5 प्रतिशत से 2.5 प्रतिशत की गई है। वहीं एक्साइज ड्यूटी घटने से पेट्रोल और डीजल के दाम भी कम हुए हैं। पेट्रोल-डीजल के दाम 2 रुपये कम होंगे।

इस फैसले से भारत में बिकने वाले सभी कंपनियों के स्मार्टफोन महंगे होंगे। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि भले ही तमाम कंपनियां भारत में अपने फोन असेंबल कर रही हों, लेकिन इनमें ज्यादातर के पार्ट्स चीन से ही आते हैं। कुछ ऐसा ही मामला टीवी का भी है।

ऐसे में वह फोन या टीवी मेड इन इंडिया हो या फिर असेंबल इन इंडिया हो दोनों प्रकार के फोन महंगे होंगे। बता दें कि भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाले शाओमी के फोन भी महंगे होगे। वित्त मंत्री ने काजू प्रसंस्करण उद्योग को की मदद करने के उद्देश्य से कच्चे काजू पर सीमा शुल्क को 5 प्रतिशत से घटाकर 2.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा है। वहीं कस्टम ड्यूटी बढ़ने से आयातित जूस के दाम भी बढ़ेंगे।

कुल मिलाकर जो सोचा था उस हिसाब से सरकार ने जनता को आर्थिक मोर्चे पर कोई राहत नहीं दी है। तकनीकी होशियार होकर कुछ मोदी केयर जैसी घोषणाएं कर लुभावनी बातें की गई हैं लेकिन ऐसा कोई काम नहीं हुआ जनता को किसी भी तरह की कोई राहत देता।

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