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brazil Tribals26 अप्रैल 2017 के दैनिक हिंदुस्तान एवं प्रभात खबर में छपी खबरों के अनुसार अपनी जमीन के लिए सड़क पर प्रदर्शन कर रहे ब्राजील के अमेजोनियन आदिवासी के लोग तीर-कमान लेकर पुलिस से भिड़ गए। इसके अलावा कई आदिवासियों ने गुलेल लेकर पुलिस पर हमला कर दिया। ये सभी पुलिस द्वारा छोड़े गए आंसू गैस के गोलों से नाराज थे। एक अंग्रेजी वेबसाइट में छपी खबर के अनुसार, बड़ी संख्या में आदिवासी ब्राजील की राजधानी ब्राजीलिया में प्रदर्शन कर रहे थे। अपनी जमीन वापस लेने के अलावा इन आदिवासियों की मांग प्रशासन द्वारा उनको और अधिक अधिकार दिए जाने की थी। प्रदर्शन में तमाम आदिवासी ताबूत को भी लेकर पहुंचे थे।

58 वर्षीय इतिहासकार मारजी डी ओलीवेरा का कहना है कि ये ताबूत बीते कुछ सालों में 305 जातीय समूह के आदिवासियों की हुई मौतों का प्रतीक है। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस के साथ हुई इस भिड़त में चार लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। हालांकि, पुलिस ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी। इस जुलूस की कोऑर्डिनेटर सोनिया गुआजाजारा ने बताया कि इस प्रदर्शन में तकरीबन 4000 लोग शामिल हुए। वहीं, पुलिस ने बयान जारी कर कहा है कि प्रदर्शनकारियों ने अपनी सीमाओं को लांघा है। उन्होंने पुलिस के साथ किए गए समझौते का पालन नहीं किया। वे लगातार आक्रमण की धमकी दे रहे थे।




क्या है पूरा मामला

संसद में घुसने की कोशिश कर जताया विरोध  

राजधानी ब्रासीलिया में उस वक्त इनकी पुलिस के साथ झड़प हो गयी, जब छोटे-छोटे समूह बना कर करीब 2,000 आदिवासियों ने संसद भवन में घुसने की कोशिश की| पुलिस ने इन्हें रोका, लेकिन वे नहीं माने|
संसद में घुसने पर आमादा जनजातीय समुदाय के इन लोगों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे| फलस्वरूप आदिवासी उत्तेजित हो गये और उन्होंने पुलिसवालों पर अपने पारंपरिक हथियार तीर-धनुष से हमला कर दिया| हालांकि, समूहों में बंट चुके आदिवासियों को संसद भवन में प्रवेश करने से रोकने में पुलिस कामयाब रही| पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को संसद भवन के पास स्थित बड़े मैदान में ही रोक दिया|

brazil1अमेजोनियन आदिवासियों की मांग 

आदिवासी चाहते हैं कि उनकी भूमि के सीमांकन का काम जल्द से जल्द किया जाये| उनके क्षेत्र में परिसीमन प्रक्रिया में बदलाव की अनुमति देनेवाले बिल पर भी उन्हें आपत्ति है| वे चाहते हैं कि इस बिल को रद्द किया जाये, ताकि उनकी जमीन से उन्हें कोई बेदखल न कर सके|

परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा यह फैसला फिलहाल राज्य सरकार की संस्था नेशनल इंडियन फाउंडेशन ने लिया है| बिल को मंजूरी मिल जाती है, तो इसे कांग्रेस को भेज दिया जायेगा, जहां सांसदों के कई ग्रुप हैं, जिनका विशेष स्वार्थ इस बिल से जुड़ा है|

जनजातीय समूहों को आशंका है कि कांग्रेस में बड़ी संख्या में भू-स्वामियों के हितों की अनदेखी करते हुए उनकी जमीन छीनने का षड्यंत्र रचा जा सकता है| इन लोगों को इस बात का भी डर सता रहा है कि अमेजन समेत कई इलाकों की जमीनें पूंजीपतियों को सौंपी जा सकती है| जनजातीय समुदाय को जब भी जमीन से बेदखल करने की कोशिश होती है, हिंसा भड़क उठती है|



एक साल में 61 लोगों की मौत2017_4$largeimg27_Apr_2017_111828075
हाल ही में पास्टोरल लैंड कमीशन (सीपीटी) की एक रिपोर्ट आयी है| ब्राजीलियाई धर्माध्यक्ष-वर्ग से जुड़ी इस रिपोर्ट में कहा गया है एक साल में भूमि संबंधी विवादों के कारण 61 लोगों की जानें गयीं, जिसमें 13 आदिवासी थे|

कॉफीन रख कर किया प्रदर्शन

जनजातीय समुदाय के लोगों ने संसद भवन के बाहर दर्जनों कॉफीन रख कर जमीन विवाद में मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि दी| यहां बताना प्रासंगिक होगा कि इसी सप्ताह देश भर के गैर-ईसाई समूहों के नेताओं की यहां बैठक होनी है|




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