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झारखंड में एक बड़ा घोटाला सामे आया है जो गरीबों के लिए बनाए जाने वाले ऊनी कम्बल की हेरफेर के तौर पर किया गया है। गौरतलब है कि गरीबों के लिए कंबल बनाने के उद्देश्य से 18।81 लाख किलो ऊनी धागा  पानीपत से मंगाने का दावा फर्जी पाया गया है। इसकी कीमत 13।63 करोड़ रुपये है।

इस हेरफेर का खुलासा किया है महालेखाकार (एजी) ने। यानी महालेखाकार ने  धागा ढुलाई के लिए प्रस्तुत किये गये 144 ट्रक से 320 ट्रिप (फेरा) का ब्योरा और तिथि का मिलान नेशनल हाइवे अथॉरिटी आॅफ इंडिया (एनएचएआइ) के आंकड़ों से करने के बाद यह नतीजा निकाला है। ।

बता दें कि जांच के दौरान इन ट्रकों की ओर से किये गये 318 ट्रिप गलत पाये गये। टोल प्लाजा से गुजरनेवाली गाड़ियों के ब्योरे से किया मिलान : एजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑडिट के दौरान झारक्राफ्ट ने पानीपत से 19।93 लाख किलो ऊनी धागा ट्रकों के सहारे अपने कलस्टरों तक पहुंचाने का दावा

इसके लिए सिर्फ ट्रांसपोर्ट के चालान का सहारा लिया।कलस्टरों की ओर से जारी किये जानेवाले प्राप्ति रसीद, स्टॉक आदि का ब्योरा उपलब्ध नहीं होने की वजह से ऑडिट टीम ने झारक्राफ्ट के दावे की जांच के लिए परिवहन चालान को आधार माना।

एनएचएआइ से एनएच-टू के टोल प्लाजा से गुजरनेवाली गाड़ियों का ब्योरा मांगा। बाद में ब्योरे का मिलान झारक्राफ्ट की ओर से पेश किये गये ट्रांसपोर्टेशन के ब्योरे से किया गया। पाया गया कि 18।81 लाख किलो ऊनी धागे की ढुलाई का ब्योरा फर्जी है।

आंकड़ों से मिलान करने के दौरान पाया गया कि  318 ट्रिप का ब्योरा टोल प्लाजा के आंकड़ों से नहीं मिलता है। पानीपत से धागा लेकर चलने के बाद अधिकतम तीन दिनों में ट्रकों को एनएच-टू के टोल प्लाजा से गुजर जाना चाहिए। पर इस अवधि में 318 ट्रिप से जुड़े ट्रकों ने टोल प्लाजा क्राॅस ही नहीं किया।

सिर्फ दो ट्रिप से जुड़े ट्रक ही टोल प्लाजा से गुजरे। जिन दो ट्रिप से जुड़े ट्रकों ने टोल प्लाजा क्राॅस किया, उससे मात्र 12000 किलो ऊनी धागा झारखंड लाया गया।

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इस घोटाले से जहाँ सरकार को नुकसान होगा वहीँ उन गरीबों तक भी उतने कंबर नहीं पहुँच पायेंगे जितने जाने चाहिए थे, आशा है जल्द ही इस मामले की पड़ताल होगी।

  • शकील अख्तर

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