(प्रतीकात्मक चित्र)
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नई दिल्ली
र्वोच्च न्यायालय में रामलला जन्मभूमि मुद्दे पर अक्टूबर-2018 में फैसला आने वाला है। विहिप व अन्य संगठनों के नेताओं, कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि फैसला रामलला जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के पक्ष में आएगा। अक्टूबर में फैसला आता है या आगे खिंचता है, दोनों ही स्थितियों में रामलला जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए उत्तरभारत के हर गांव से ईंट पूजन कर लाने का अभियान शुरू करने की योजना है। इधर यह चलेगा, उधर जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन के दौरान केन्द्र सरकार धारा-370 को खत्म करने की पहल कर सकती है। यह होते ही विपक्षी दल, भाजपा व केन्द्र की राजग सरकार पर पील पड़ेंगे।

(प्रतीकात्मक चित्र)

पूरा विपक्ष जम्मू-कश्मीर के उन मुस्लिम परस्त दलों की तरफदारी में खड़ा हो जाएगा, जो धारा-370 बनाये रखने को लेकर लड़क पर उतरेंगे। आजादी के बाद से ही जम्मू-कश्मीर में धारा-370 खत्म करने की मांग को लेकर आंदोलन करने वाले जनसंघ के नेता, उसके बाद बनी भाजपा के नेता अपने चुनावी एजेंडे में धारा-370 खत्म करने का वादा करते रहे।

सूत्रों का कहना है कि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार को धारा-370 खत्म करने के लिए अक्टूबर-2018 से बेहतर मौका शायद ही मिले। यदि सरकार ने जम्मू-कश्मीर में अक्टूबर-नवम्बर,2018 में धारा-370 खत्म किया तो वहां के मुसलमान, राजनीतिक दल और उनकी समर्थक विपक्षी पार्टियां एकजुट होकर हल्ला बोलेंगी। संसद का शीतकालीन सत्र ठप करेंगी, जिससे पूरा माहौल हिन्दू बनाम मुसलमान हो जाएगा। जिसका भाजपा को भरपूर लाभ दिसम्बर 2018 में होने वाले राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों में तो मिलेगा ही, अप्रैल-2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों में भी मिलेगा। इस तरह ये दोनों चाल भाजपा के 2019 फतह के लिए ब्रम्हास्त्र साबित हो सकते हैं।

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