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जमशेदपुर। बाउल संगीत का आनंद एक बार फिर शहर के लोग उठा पाएंगे। संगीत के दीवानों के लिए बांग्ला संस्कृति की अनुपम देन है रविन्द्र संगीत और बाउल संगीत हैं। बाउल पश्चिम बंगाल का प्रसिद्ध आध्यात्मिक लोक गीत है।बाउल एक विशेष लोकाचार और धर्ममत भी है। इस मत का जन्म बंगाल की माटी में हुआ है।

बाउल वाद्ययंत्र

जैसे सूफियाना संगीत आध्यात्म के नजदीक ले जाती है, ठीक वैसे ही बाउल संगीत भी लोगों में आध्यात्म को जगाने का काम करती है। सामान्यतौर पर आउल, बाउल, फकीर, साई, दरबेस, जोगी एवं भाट बाउल के ही रूप है। इन सभी में एक समानता होती है कि ये पागलपन की हद तक ईश्वर की भक्ति में लीन होते हैं। उत्तर-प्रदेश में संगीत के ऐसे दीवानों को फकीर या जोगी भी कहा जाता है।  ये संगीतमय ढंग से कथावाचन का काम करते हैं। मूलतः बाउल गायक घुमंतू प्रवृति के होते हैं।

टैगोर सोसायटी के बैनर तले 18 मार्च की संध्या 6.30 बजे से साकची स्थित रवींद्र भवन में छह सदस्यीय टीम गौतम दास बाउल के नेतृत्व में प्रस्तुति देगी। इसकी जानकारी देते हुए टैगोर सोसायटी जमशेदपुर के महासचिव आशीष चौधरी  ने बताया कि कविगुरु की कर्मभूमि शां‍ति निकेतन से यहां बाउल संगीत का दल आ रहा है, जिनके पास कविगुरु की संगीत रचनाएं एवं बाउल का मदहोश कर देने वाला वाद्य का संगम है। आशीष चौधरी ने कहा कि कविगुरु की रचनाओं से प्रेम करने वाले तथा बाउल संगीत समझने वाले लोग कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। इसके लिए टिकट नहीं रखा गया है।

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