(स्थानीय नागरिकों को खसरा और रूबेला के टीकाकरण कार्यक्रम के प्रति जागरूक करते हुए सिमडेगा हॉकी के महासचिव मनोज कोनबेगी)
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सिमडेगा (झारखण्ड) से ग्रास रूट रिपोर्टर देव दर्शन बड़ाईक की रिपोर्ट।
झारखण्ड सरकार द्वारा मिजिल्स और रूबेला की रोकथाम के लिए इन दिनों टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। यह मिजिल्स और रूबेला की रोकथाम से जुड़े राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा है। इस अभियान की शुरुआत में ही पलामू से में टीका लगने से बेहोश हो गए स्कूली बच्चों की घटना ने पूरे राज्य में मिजिल्स – रूबेला टीकाकरण को लेकर एक भय का वातावरण बन गया है। बहुत तेजी से यह अफवाह फैली है कि टीका लेने से बच्चों की मौत हो जाएगी। आलम यह है कि अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से भी डर रहे हैं। सिमडेगा के कई स्कूलों में बच्चे इस भय से स्कूल नहीं आ रहे हैं।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, के दिशा निर्देशानुसार सिमडेगा के विभिन्न विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 9 माह से 15 वर्ष तक बच्चों को टीका लगाया जा रहा है। सिमडेगा में अफवाह फैल गई है कि इस टीके को लेने से बच्चों की मौत हो जाएगी या बच्चे बाँझ हो जाएंगे, इसलिए गांवो के बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं।

खसरा और रूबेला के टीकाकरण कार्यक्रम को लेकर पैदा हुए डर और भ्रम की स्थिति से निपटने के लिए सरकार के साथ-साथ अनेक सामाजिक कार्यकर्ता भी सामने आकर जागरूकता अभियान चला रहे हैं। क्षेत्र के कोनबेगी स्कूल में आयोजित टीकाकारण कार्यक्रम में अनुपस्थिति के कारण बहुत कम बच्चों ने टीका लगाया जा सका। इस बात की जानकारी गांव के सामाजिक कार्यकर्ता एवं सिमडेगा हॉकी के महासचिव मनोज कोनबेगी को हुई। उन्होंने स्कूल में जाकर शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से इस संबंध में जानकारी ली। एक बच्चे ने कहा कि “गांव में महिलाएं बात कर रही हैं कि यह टीका लेने से हम लोगों की मौत हो जाएगी इसलिए हमलोग डर से सुई नही ले रहे हैं।”

(स्कूली बच्चों को मिजिल्‍स और रूबेला टिकाकरण की जानकारी देते हुए जागरूकता अभियान के संचालक मनोज कोनबेगी)

इस बात से प्रभावित होकर मनोज कोनबेगी खसरा और रूबेला के टीकाकरण कार्यक्रम को लेकर जागरूकता अभियान चलाने का निश्चय किया। उन्होंने बच्चों से कहा कि जब सरकार पढ़ने के लिए किताब, पहनने के लिए यूनिफॉर्म, खाने के लिए भोजन, रहने के लिए पक्का मकान देती है तो वही सरकार टिका देकर अपने बच्चों को क्यूँ मारेगी? इस अभियान के तहत गांवो में जाकर खेतो में काम कर रहे अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों को खसरा और रूबेला के टीकाकरण कार्यक्रम के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

इस जागरूकता अभियान का विद्यार्थियों और अभिभावकों में सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और टिका लगवाने वाले बच्चों की संख्या बढ़ रही है।

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