Tuesday, August 21, 2018
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संजय जोठे

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संजय जोठे एक चर्चित स्वतंत्र लेखक हैं। वे राजनैतिक, सामाजिक, धर्म, आध्यात्म और दलित विषयों पर बेबाक लेखन के लिए जानें जाते हैं। समता, न्याय और सम्मान के पैरोकार संजय हिंद वॉच मीडिया के लिए नियमित रूप से लिखते रहे हैं। हिंद वॉच मीडिया जमीनी सरोकारों से जुड़ी जनपक्षधरता की पत्रकारिता कर रहा है। साप्ताहिक अखबार, न्यूज़ पोर्टल, वेब चैनल और सोशल मीडिया नेटवर्क के माध्यम से जमीनी और वास्तविक ख़बरों को निष्पक्षता और निडरता के साथ अपने पाठकों तक पहुंचाने के लिए हिंद वॉच मीडिया पूरी समर्पण से काम करता है। भारत और विदेशों में यह वेब पोर्टल पढ़ा जा रहा है।
ओशो रजनीश पर जो नयी डॉक्युमेंट्री आई है उसे गौर से देखिये। शीला एक नादान किशोरी की तरह रजनीश से मिलती है। शीला के पिता रजनीश से प्रभावित हैं। शीला को उनके पिता कहते हैं कि ये व्यक्ति अगर...
गौतम बुद्ध को पता चल चुका था कि उनकी मृत्यु तय हो चुकी है। एक गरीब लोहार के घर जहरीला भोजन खाने से उनके शरीर में जहर फैलने लगा था। गौतम बुद्ध जहर को अपने शरीर में फैलता हुआ...
एक अफ़गान मित्र जो कि वरिष्ठ एन्थ्रोपोलोजिस्ट (मानव-विज्ञानी/समाजशास्त्री) हैं और राजनीतिक शरणार्थी की तरह यूरोप में रह रही हैं। शाम होते ही वे कसरत करने लगीं, दौड़ने लगीं। वे अकेली नहीं थीं उनके साथ स्थानीय यूरोपीय लड़कियां और दो...
यहाँ जिन लोगों को ब्रह्मपुरुष के मस्तिष्क ने जन्म दिया उनका मस्तिष्क कोइ काम नहीं करता, भुजाओं से जन्मे लोगों की भुजाओं में लकवा लगा है, उन्होंने हजारों साल की गुलामी भोगी, पेट से जन्मे वणिकों ने अपना पेट...
भारत के धार्मिक दर्शनों में अब तक बौद्ध धर्म के अनत्ता के सिद्धांत को ठीक से नही समझा गया है| इसके भारी दुष्परिणाम हुए हैं| एक चैतन्य सनातन आत्मा और उसके सर्जक परमात्मा (ईश्वर) की कल्पना ने भारत को...
बाबाओं के सम्मोहन के विषय में बात करते हुए आप अगर ओशो रजनीश को भूल रहे हैं तो आप सबसे बड़ी भूल कर रहे हैं, वर्तमान बाबा बाजार का जहरीला मॉडल देने वाले इन बाबाजी को बार बार समझना...
भारत में बहुत तेजी से शिक्षा पद्धति और इतिहास में बदलाव किया जा रहा है| वर्तमान सरकार अपने भगवा एजेंडे को लागू करने के लिए इतना आतुर है कि बच्चों के सिलेबस में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर मनमाना बदलाव...
भारत के दलितों आदिवासियों, ओबीसी (शूद्रों) और मुसलमानों को मानविकी, भाषा, समाजशास्त्र, दर्शन इतिहास, कानून आदि विषयों को गहराई से पढने/पढाने की जरूरत है| कोरा विज्ञान, मेडिसिन, मेनेजमेंट और तकनीक आदि सीखकर आप सिर्फ बेहतर गुलाम या धनपशु ही...
गौरवपूर्ण अतीत और बहुसंस्कृति की खूबियों के बावजूद भारतीय समाज स्वाभाविक रूप से वैज्ञानिक और प्रगतिशील कम दिखता है| वैज्ञानिक सोच पर आधारित सभ्य समाज बनने में भारत की चुनौतियों की पड़ताल कर रहे हैं संजय जोठे | जो लोग...
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