Monday, November 12, 2018
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पंकज चतुर्वेदी

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पर्यावरणविद, लेखक एवं जाने-माने स्वतंत्र पत्रकार पंकज चतुर्वेदी लम्बे समय से पर्यावरण एवं सम-सामयिक विषयों पर प्रमुखता से लिख रहे हैं। पर्यावरण विषय पर केन्द्रित "जल माँगता जीवन' उनकी हालिया पुस्तक है। इसके अलावा बाल साहित्य भी उनकी रूचि का क्षेत्र है और उन्होंने बच्चों के लिए अनेक पुस्तकें लिखी हैं। वे राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की पत्रिका "पुस्तक संस्कृति" के संपादक हैं। देश की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं और वेब-पोर्टल्स में उनके आलेख / रिपोर्ट और रचनाएं प्रकाशित होती रही है।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम यानि यूनेप की रपट कहती है कि दुनिया के कोई 100 देशों में उपजाउ या हरियाली वाली जमीन रेत के ढेर से ढक रही है औा इसका असर एक अरब लेागों पर पड़ रहा है।...
एक तरफ अंतरिक्ष को अपने कदमों से नापने के बुलंद हौसलें हैं, तो दूसरी तरफ दूसरों का मल सिर पर ढ़ोते, नरक कुंड की सफाई करती मानव जाति। संवेदनहीन मानसिकता और नृशंस अत्याचार की यह मौन मिसाल सरकारी कागजों...
दिल्ली के एक नामचीन पब्लिक स्कूल के कक्षा तीन के बच्चे को गृह-कार्य डायरी में लिख कर भेजा गया कि बच्चे का ‘श्रुत लेखन’ का टेस्ट होगा। बच्चे के माता-पिता अंग्रेजी माध्यम से पढ़े थे। अपने परिचितों को फोन...
पिता राधामोहन ने सन 1982 में 'प्रातःकमल' के नाम से एक अखबार प्रारंभ किया था। बाद में ब्रजेश ने अपने पिता की विरासत को विस्तार देकर एक अंग्रेजी और एक उर्दू अखबार भी शुरू किया। जमीन के धंधे से...
मुजफ्फरपुर, फिर एनआरसी और कांवड़िये… ऐसे ही नए मुद्दे क्या खड़े हुए कि समाज भूल गया कि दिल्ली में संसद से बामुश्किल 12 किलोमीटर दूर गगनचुंबी इमारातों के बीच बसे मंडावली गांव में तीन मासूम बच्चियों की मौत भूख...
बहुप्रतिक्षित राष्ट्रीय नागरिक पंजी यानि एनआरसी का पहला ड्राफ्ट आते ही सीमावर्ती राज्य असम में तनाव बढ़ गया है। सूची में घोषित आतंकी व लंबे समय से विदेश में रहे परेश बरूआ, अरूणोदय दहोटिया का नाम तो है लेकिन...
आषाढ़ की पहली बरसात में एक घंटे पानी क्या बरसा राजधानी दिल्ली व उससे सटे शहर ठिठक गए। सड़ाक पर दरिया था और नाले उफान पर थे। दिल्ली से सटे गाजियाबाद, नोएडा, गुडगांव जैसे शहरों के बडे नाम घुटने-घुटने...
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के जलालपुर स्थित कोल्ड स्टोरेज के मालिक ने पिछले दिनों अपने गोदाम में एक साल से भरा आलू निकाल कर सड़क पर फेंक दिया। लोगों ने लूटा, जानवरों ने खाया फिर भी चारों ओर आलू...
सात नवंबर की रात से दिल्ली व उसके आसपास घना स्मॉग क्या छाया, तमाम लोगों ने सारा दोष पंजाब-हरियाण के किसानों के पराली जलाने पर डाल दिया गया। वातावरण के जहरीले होने की ऐसी इमरजेंसी घोषित की गई कि पांच...