Wednesday, December 19, 2018
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डॉ. अशोक गौतम

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हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले की अर्की तहसील के म्याणा गांव में जन्में डॉ. अशोक गौतम हिमाचल प्रदेश के उच्चतर शिक्षा विभाग में एसोशिएट प्रोफेसर के  पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से साठोत्तर प्रमुख हिंदी नाटकों में अस्तित्ववादी-चेतना शोध विषय पर पीएच.डी किया है। मुख्य रूप से वे व्यंग्य लिखते हैं और “लट्ठमेव जयते”, “गधे ने जब मुंह खोला”, “झूठ के होलसेलर”, “खड़ा खाट फिर भी ठाठ”, “ये जो पायजामे में हूं मैं”, “साढ़े तीन आखर अप्रोच के”, “मेवामय ये देश हमारा”, “फेसबुक पर होरी”,  “पुलिस नाके पर भगवान”, “वफादारी का हलफ़नामा” और “नमस्कार को पुरस्कार” उनके प्रकाशित व्यंग्य संग्रह हैं। उनकी रचनाएं विगत 30 वर्षों से देश के प्रतिष्ठित अखबारों, पत्रिकाओं और वेब-पोर्टल्स में निरंतर प्रकाशित हो रही हैं। संपर्कः- गौतम निवास, अप्पर सेरी रोड, नजदीक मेन वाटर टैंक, सोलन, 173212 (हिमाचल प्रदेश) मोबाइल नम्बर : 9418070089, ई-मेल : [email protected]
हर तीज त्योहार को अपने घर मिठाई ले जाना भूल जाऊं तो भूल जाऊं, पर जिन अफसरों से मेरा साल भर काम करवाने के लिए वास्ता पड़ता रहता है, उनके घर मिठाई ले जाना नहीं भूलता। उन्हें भी पता...
दिवाली तक आते आते पूरी तरह दिवालिया हो चुका हूं। बस, लक्ष्मी से अब यही कामना है कि मेरे पिछले चार साल से सरकार के पास फंसे पंद्रह लाख दिलवा दें तो मैं चार चार लोनों की किस्तों से...
अभी बकरी की निष्‍पक्ष जांच चल ही रही थी कि अचानक जांच बीच में रूक गई तो मुजरिमों के बदले मैं परेशान हो उठा। पता करने पर पता चला कि बकरी की मौत की निष्‍पक्ष जांच करने वाले अपनी...
उन्होंने अबके दशहरे में जलाने को रावण का आधा पौना पुतला तैयार किया और मेरे घर मेरी कस्टडी में इसलिए छोड़ गए कि मैं पुलिस विभाग का बंदा हूं। कम से कम मेरे पास से रावण भागेगा नहीं। वैसे...
मेरे बापू भी देश के बापू की तरह प्रयोगधर्मी थे। वे भी परिवार के लिए तरह तरह के प्रयोग किया करते थे। पर उनके असत्य के प्रयोग बहुत सफल हुए। सो हमारे परिवार ने उनके बाद भी वे प्रयोग...