Print Friendly, PDF & Email

माननीय श्री हर्षवर्धन जी,
मैं यह पत्र आपको अपने प्रिय शहर दिल्ली की चिंता करने वाला एक दिल्लीवासी समझकर कर लिख रहा हूं। इसके अलावा आपको को पत्र लिखने का एक कारण हाल ही में दिल्ली के पर्यावरण को लेकर आपकी अचानक हुई सक्रियता भी है। आपने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए 70 टीमें बनाने की घोषणा की है। यह 70 टीमें विभिन्न क्षेत्रों में प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपाय करेंगी। मैं आपकी मंशा पर कोई सवाल नही उठाना चाहता हूं पंरतु दिल्ली में बढ़ते हुए प्रदूषण को देखता हूं और आपके द्वारा किये जा रहे उपायों पर निगाह डालता हूं तो आपके मंत्रालय द्वारा किये जा रहे उपायों को सतही और न्यायपालिका को संतुष्ट करने की कोशिश के लिए किये जा रहे प्रयासों से अधिक कुछ नही पाता हूं।

दिल्ली में प्रदूषण को सबसे अधिक बढ़ावा देने वाले दो प्रमुख कारण हैं, एक निर्बाध ढ़ंग से जारी अवैध निर्माण और दूसरा वाहनों से होने वाला प्रदूषण। पहले को रोकने के लिए डीडीए के वाइस चैयरमेन की अध्यक्षता में एक एसटीएफ का गठन किया गया है। परंतु आप यदि अपनी 70 टीमों को दिल्ली के तीनों निगमों में अवैध निर्माण पर की गयी कार्रवाई की जांच करने के लिए कहें और निगम के दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करें तो शर्तिया आपको आधे से अधिक निगमकर्मियों को घर भेजना पड़ जायेगा। दिल्ली में जितनी भी संपतियों को सील किया गया है अथवा ध्वस्त किया गया है, आप पायेंगे की सारी कार्रवाई केवल कागजों पर ही है। जमीन पर सील की गई और ध्वस्त की गयी सभी संपतिया सुरक्षित और शान से खडी हैं। इस अव्वल दर्जे के भ्रष्टाचार के कारण ही दिल्ली का 60 प्रतिशत प्रदूषण है। मैं दावे से कहता हूं कि आप यदि दिल्ली पुलिस और नगर निगम के भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की कोई योजना बनायें तो दिल्ली को इस जानलेवा प्रदूषण के 60 प्रतिशत हिस्से से निजात मिल सकती है।

नगर निगम के अलावा दूसरा प्रदूषण बढ़ने का कारण वाहनों का प्रदूषण है। इसे नियंत्रित करने के लिए अब निजी वाहनों पर बंदिश लगाने की बाते होने लगी हैं। यदि प्रदूषण को रोकने के लिए यह जरूरी है तो अवश्य किया जाना चाहिए परंतु उस डीजल बस माफिया का क्या जो दिल्ली पुलिस और परिवहन विभाग की मिलीभगत से प्रदूषण फैलाने का एक बड़ा कारण बना हुआ है। इस बस माफिया की दो ऐसे करतूतों पर मैं यहां रोशनी डालना चाहूंगा जो माननीय न्यायपालिका नेशनल हरित न्यायाधिकरण की आंखों में दिल्ली पुलिस और परिवहन विभाग की साठगांठ से धूल झौंक रहा है।

पहला एनजीटी और उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली में प्रदूषण को थामने की नीयत से डीजल बसों के पंजीकरण पर रोक लगा दी और यह कदम दिल्ली में सीएनजी बसों को संचालित करने और प्रदूषण को नियंत्रित करने की नीयत से किया था। परंतु दिल्ली में प्राइवेट बस मालिकों ने क्या कमाल का रास्ता डीजल बसों को चलाये रखने का निकाला। उन्होंने अपनी डीजल बसों को दिल्ली में पंजीकृत करने की अपेक्षा उन्हें पडोसी राज्यों में पंजीकृत करा लिया। आप दिल्ली के पुराने रहने वाले हैं। आपके स्थायी निवास कृष्णानगर में अनेकों टूर आपरेटर्स के कार्यालय हैं। जाहिर है उनसे से कईं आपके परिचित भी होंगे। इसके अलावा आपके कईं निजी स्कूलों के मालिक भी होंगे आप उनके स्कूलों में झांककर इस सच्चाई को देख सकते हैं कि वहां छात्रों को लाने ले जाने के मकसद से यूपी नंबर की बसे क्यों हैं। या आपके घर के करीब के टूर आपरेटर के पास इतनी यूपी नंबर की बसें पिछले सालों में अचानक क्यों बढ़ गयी हैं। इसी प्रकार हरियाणा के साथ सटे इलाकों में आपको हरियाणा और राजस्थान नंबर की बसें मिल जायेंगी। अब यही इस बस माफिया का कमाल है कि उन्हें न्यायपालिका ने डीजल बसें बदलने के लिए कहा और उन्होंने केवल अपनी नंबर प्लेटे ही बदली बाकि सब यथावत बना रहा। आपके स्थायी निवास कृष्णानगर के बेहद करीब कडकडडूमा सीबीडी मैदान में आप इन्हें अवैध तरीके से रोजाना पार्क किये देख सकते हैं और इसके अलावा दिल्ली पुलिस मुख्यालय के एकदम करीब शहीद भगत सिंह पार्क के पास भी आप इनके जमावडे का रोजाना आनन्द ले सकते हैं। ऐसे बसों की दिल्ली में संख्या कईं हजारों में जाहिर है कि इनसे प्रदूषण ही बढ़ता होगा।

इसके अलावा इस बस माफिया का दूसरा कमाल दिल्ली के विभिन्न इलाकों से चलने वाली पडोसी राज्यों की खटारा बसें हैं। वह रोजना दिल्ली में आती हैं और विभिन्न इंटरस्टेट रूटों पर बगैर परमिट और बगैर किसी अन्य प्रकार की इजाजत के चलती हैं। आप इन्हें यमुनापार के विभिन्न इलाकों से रोजाना चलते देख सकते हैं। यह इसे दिल्ली से रोजाना मुरादाबाद, हरदोई, बिजनौर, बरेली, शहाजहांपुर, आजमगढ़ जैसे यूपी के विभिन्न इलाकों में जाती हैं। एक बस में यात्रियो को जानवरों की तरह भरा जाता है। आपको हैरानी हो सकती है कि एक बस में एक बार में 100 से लेकर 120 तक यात्रियों को ठूसा जाता है। हाल ही में मैनपुरी के करीब इसी प्रकार की एक बस के पलट जाने के कारण 20 यात्रियों की मौत हो गयी थी। और यह भी आश्चर्यजनक परंतु सत्य है कि इस बस के आपरेटर का कार्यालय आपके स्थायी निवास के बेहद करीब कांति नगर में ही है। दिल्ली के विभिन्न इलाकों में इस समानान्तर परिवहन प्रणाली के बस स्टैंड हैं। जिसमें सबसे प्रमुख इलाके विजय घाट, खजूरी, सीलमपुर, वेलकम, सीमापुरी, कांतिनगर, ओखला, जामियानगर, धोलाकुंआ आदि हैं। सरकार के राजस्व को हडपने वाली और हमारी सांसों में जहरीला धुंआ भरने वाली इस समानान्तर परिवहन प्रणाली की बसों की संख्या 1000 से 1500 के आसपास है।

आप की 70 टीमें संभवत उस प्रदूषण को रोक नी सकती हैं जिससे दिल्ली गैस का चैंबर बन रही है परंतु यदि आप 5 से 10 टीमें इस बस माफिया पर काबू करने में लगा दें और यह सुनिश्चित कर दें कि भविष्य में भी यह बस माफिया सक्रिय ना हो सके तो शर्तिया आप दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के बडे हिस्से को नियंत्रित करने का स्थायी हल कर सकेंगे। मैं यह पत्र आपको एक मंत्री से पहले एक दिल्लीवासी समझकर लिख रहा हूं और आशा करता हूं कि आपको दिल्ली से उतना ही प्यार होगा जितना मुझे अथवा किसी अन्य दिल्लीवासी को है और आप बस माफिया के इस भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाकर हमें थोडी राहत देने का काम करेंगे और आपका प्रदूषण नियंत्रण अभियान वास्तविक होगा अदालत को संतुष्ट करने वाली कोई रस्म अदायगी नही।
महेश राठी

इस पोस्ट पर आपकी प्रतिक्रिया ⇓