(झारखण्ड के रांची-टोरी रेल लाइन पर है यह अनाम रेलवे स्टेशन)
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रांची से लोहरदगा के लिए प्रस्तावित रेल लाइन को आगे बढ़ाकर टोरी तक कर दिया गया था। लम्बे इन्तजार के बाद 2017 में केन्द्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभू ने रांची से टोरी रेल लाइन का उदघाटन दिल्ली के रेल भवन से ऑनलाइन किया था।

इसी रांची से टोरी रेल लाइन में वह वह रेलवे स्टेशन है जिसका कोई नाम नहीं है।

यहाँ पैसेंजर ट्रेन रूकती है। एक मिनट के इस ठहराव के दौरान अनेक लोग पैसेंजर से उतरते और चढ़ते हैं।  आसपास के गाँव कमले, बड़कीचांपी, छोटकीचांपी, सुकुमार आदि के रहने वाले दर्जनों लोग इस स्टेशन का रोजाना इस्तेमाल करते हैं।

रांची या लोहरदगा से इस स्टेशन तक जाने के लिए टिकट भी मिलता है और उस टिकर पर लिखा होता है बड़कीचांपी। तो क्या इस स्टेशन का नाम रेलवे के रिकॉर्ड में बडकीचांपी है। अगर ऐसा है तो दूसरी जगहों पर जैसे प्लेटफॉर्म, यात्री शेड या किसी भी सार्वजनिक सूचना पट्टिका पर स्टेशन का नाम क्यूँ नहीं लिखा गया है।

दरअसल, दो गांवों के बीच इस स्टेशन के नामकारण को लेकर विवाद चल है। यह विवाद नया नहीं है। 2011 में स्टेशन की शुरुआत से ही इसके नामकरण को लेकर ‘कमले’ गाँव के लोगों को ऐतराज है। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्टेशन कमले की जमीन पर बना हुआ है और इस गाँव के लोगों ने इस स्टेशन के निर्माण के दौरान यहाँ मजदूरी की है। इसलिए स्टेशन का नाम कमले होना चाहिए। रेलवे के रिकॉर्ड में यह स्टेशन फिलहाल बड़कीचांपी है।

कमले गाँव के लोग पूछ रहे हैं कि आखिर किस आधार पर रेलवे ने इसका नाम ‘बड़कीचांपी’ तय कर दिया।  यही कारन है कि कमले गाँव के हम लोगों ने प्लेटफॉर्म पर आज तक रेलवे स्टेशन का नाम नहीं लिखने दिया।

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यह एक दिलचस्प कहानी जैसा जरूर लगता है लेकिन ये सच है कि झारखण्ड के रांची–टोरी रेल लाइन पर स्थित देश का अनाम रेलवे स्टेशन।

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