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समय कब किसी करवट ले कोई कह नहीं सकता। जो पिता बेटी की जान के लिए दुआ मांगता है वही उसकी मौत की गुहार लगाता है।

ऐसा क्यों, आइये जानते हैं। दरअसल मसला इच्छा मृत्यु से जुड़ा है। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के पुरुषोत्तम कुमार दीक्षित ने उनकी बेटी और खुद के लिए इच्छा मृत्यु मांगी है।

गौरतलब है कि 70 वर्षीय पुरषोत्तम की 23 वर्षीय बेटी रुची बीते 5 वर्षों से बिस्तर पर है। उसकी यह हालत स्कूल में एक बच्चे की जान बचाने के बाद हुई थी।

लेकिन शासन प्रशासन की नजरअंदाजी के चलते अब पिता और बेटी उनके लिए इच्छा मृत्यु मांग रहे हैं।

पुरषोत्तम दीक्षित ने बताया कि वह प्राइवेट सुरक्षा कर्मी थे। उनकी बेटी रुचि एसएस एजुकेशन सेंटर भौंती के स्कूल में टीचर थी। 26 जुलाई 2013 को एक हादसे में वह अपाहिज हो गई।

पिता बताते हैं कि रुचि कक्षा 4 के छात्रों को पढ़ा रही थी। अचानक क्लास का स्ट्रक्चर भरभराने लगा। टीन के शेड में चल रहे स्कूल की टीन नीचे आती देख रुचि ने बच्चों को बचाने का प्रयास किया।

उसने खुद की पीठ पर टीन का भार ले लिया और बच्चों के क्लास के बाहर जाने को कहा। रुचि ने पुलिस को भी फोन करके बुलाया। रुचि ने बच्चों की जान तो बचा ली लेकिन हादसे में उसके स्पाइन में गंभीर चोट आई।

इलाज के दौरान डॉक्टर्स ने बताया कि वह अब कभी उठ नहीं पाएगी। उन्होंने बताया कि रुचि के इलाज में उन्होंने 5 लाख रुपये खर्च किए उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तरफ से 3 लाख रुपये मिले लेकिन रुचि ठीक नहीं हो सकी।

उन्होंने बताया कि वह कितने दिनों तक जिंदा रहेंगे उन्हें नहीं पता। उन्हें सिर्फ उनकी बेटी की चिंता होती है कि उनके मरने के बाद उसका ख्याल कौन रखेगा, इसलिए वह चाहते हैं कि उन्हें और उनकी बेटी को इच्छा मृत्यु दे दी जाए।

मामला बहुत भावुक और मानवीय लिहाज से संवेदनशील है। आशा है इस मामले में सावधानी बरती जायेगी।

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