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अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों पर यकीन करें तो सीरिया में केमिकल अटैक का 500 लोगों पर असर हुआ है, बावजूद इसके अगर हर कोई इस बात को खारिज कर रहा है तो सीधा मतलब यह है की दुनिया रसायन युद्ध के हालातों से घबरा रही है। यह बात खारिज करने वाली नहीं है।

अगर सच में कैमिकल अटैक हुआ है तो दुनिया के लिए इस से ज्यादा खतरे की बात आज की तारीख में हो ही नहीं सकती। दुनिया अभी भी नागासाकी और हिरोशिमा प्रकरण नहीं भूली है। अगर परमाणु या न्यू क्लियर हमले की तरज पर कैमिकल हमले भी होने लगे तो दुनिया का नाश तय है।

गौरतलब है कि सीरिया के पूर्वी गोता में विद्रोहियों के आखिरी ठिकाने डौमा शहर में किए गए केमिकल अटैक से करीब 500 लोग प्रभावित हुए हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने कहा कि 500 से अधिक लोगों में केमिकल अटैक का असर होने के लक्षण पाए गए हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सीरिया जाने देने की अनुमति भी मांगी है ताकि हालात का जायजा लिया जा सके। पिछले सप्ताह डौमा में हुए केमिकल अटैक में कम से कम 70 लोग मारे गए थे। वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि इस अटैक में नर्व गैस का इस्तेमाल किया गया था, जिससे लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया और उनके मुंह से झाग निकलने लगा। वि

एक गवाह ने बताया, ‘यह हमला जब हुआ, उस वक्त लोग बेतहाशा भागने लगे। उनके मुंह से झाग निकल रहे थे और शहर में जो भी क्लीनिक खुले थे लोग आनन-फानन में वहां पहुंचे। अस्पताल के स्टाफ को तुरंत यह पता चल गया था कि यह कुछ अलग हुआ। पीड़ितों को क्लोरीन की तेज गंध महसूस हुई, लेकिन इस बार पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा लोग गैस अटैक से प्रभावित हुए थे।’

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मरहूम ने कहा कि मुझे और अन्य मेडिकल वर्कर्स को यह संदेह हुआ कि लोगों को मारने वाली यह गैस क्लोरीन से कहीं ज्यादा ताकतवर है। उन्होंने कहा, ‘हमें लगता है कि इस अटैक में क्लोरीन के अलावा किसी और गैस का भी इस्तेमाल किया गया था।’ मरहूम ने 2 साल के दो मासूम बच्चों की दम घुटने से मौत होने की घटना बयां करते हुए कहा, ‘उनके शव ठंडे और अकड़े हुए पड़े थे। उनके मुंह से झांग निकल रहा था। उनके शरीर पर कोई जख्म नहीं थे, निश्चित तौर पर दम घुटने के चलते उनकी मौत हुई थी।’

पर प्रतिक्रिया में अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा, ‘हमने कई परेशान कर देने वाली रिपोर्ट देखीं। सीरियाई सरकार का अपने लोगों के खिलाफ रासायनिक हथियारों को इस्तेमाल करने का इतिहास रहा है।’ सरीन नर्व एजेंट का इस्तेमाल सीरिया में पहले भी हो चुका है।

यह देखकर यों लगता है अब वह दिन दूर नहीं जब दुनिया युद्ध के मुहाने पर होगी और ऐसे घातक हथियार मानवता का नाश कर देंगे।

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