कहते हैं कि वर्तमान की हर त्रासदी और आपदा के बीज गुज़रे ज़माने के गर्भ में छिपे होते है और इनका प्रभाव भविष्य में साफ़ दिखता है। प्रदूषण के लिहाज से इंग्लैंड की दिसम्बर 1953 की ग्रेट स्मॉग घटना भी यही संकेत देती है। गौरतलब है कि आज से 63 साल पहले लन्दन में धुएं और कोहरे का मिश्रण पाँच दिन तक ठहरा रहा। कोहरा इतना घना था कि विजिबिलिटी ख़त्म सी हो गयी थी। इस भयानक धुएं से करीब 12 हजार जानें गईं। जिस धुएं को लेकर इंग्लैड सरकार बेपरवाह थी वो बाद में प्रदूषण की जहरीली हवा निकली। नतीजतन सरकार को क्लीन यार एक्ट लागू करना पडा। कारखानों की वजह से आयी वो आपदा इंगलैंड को काफी भारी पड़ी थी। लन्दन में 1952 में ग्रेट स्मॉग की वजह से जो जानलेवा मंजर दिखा वह हमारे देश में कभी भी दिख सकता है। इंग्लैंड की यह घटना हमारे वर्तमान और भविष्य के लिए एक बड़ी नसीहत है।
सेंटर फार साइंस एंड एनवायरनमेंट की एक रिपोर्ट की मानें तो राजधानी में प्रतिवर्ष 10 हजार से लेकर 30 हजार मौतें बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण होती हैं। पूरे देश में होने वाली कुल मौतों का यह पांचवां बड़ा कारक है। रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि इस प्रदूषण के लिए सिर्फ सरकार या कल कारखाने ही नहीं बल्कि हम भी है। दरअसल हमारे मानसिकता कुछ इस तरह की हो चुकी है कि हम अपना घर तो साफ़ रखते हैं लेकिन घर के बाहर पड़े कचरे से कोई वास्ता नहीं रखते। फिर चाहे वह जाम नाली हो, गली में फैला कई दिनों का सड़ागला कूडा हो। हम इसे दरकिनार कर देते हैं और जब इस तरह की गंदगी सड़कर हवा को जहरीला बनाती है तो हम बढ़ते प्रदूषण का रोना रोने लगते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वाहनों से प्रतिदिन 60 से 70 प्रतिशत पीएम। 2.5 जमा होता है, जबकि कूड़ेकचरे एवं सूखी पत्तियों के जलाने से पीएम 10 जमा हो जाता है। अगर कूड़ेकचरे में यदि प्लास्टिक, रबड़, टायर जैसी चीजें हों तो यह और भी हानिकारक हो जाता है। ऐसे में हम कभी भी खुले में कूड़ाकचरा जलने से परहेज नहीं करते। सच तो यह है कि हम बदलना ही नहीं चाहते। हमें लगता है कोई और आएगा और एक दिन सारी देश की गंदगी साफ़ कर देगा। और तब तक हम इसी जहरीली हवा में सांस लेते रहेंगे। बहुत हुआ तो एक मास्क खरीद लेंगे। दरअसल यह एक तरह का मानसिक प्रदूषण है तो लगभग पूरे देश के दिमाग में घर कर चूका है और इसी मानसिक प्रदूषण की बदौलत उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, हरियाणा और दिल्ली समेत लगभग पूरा देश प्रदूषण की चपेट में है। अगर हम सब अपनी जिम्मेदारी समझें और अपने आसपास किस भी तरह का प्रदूषण होने से रोक सकें तो यह काफी होगा।

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