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bharat-rang-mahotsav-nsd-delhi_650x400_41486038638बसंत पंचमी के उल्लास और बजट की उत्सुकता के बीच भारत ही नहीं एशिया के सबसे बड़े नाट्य उत्सव भारत रंग महोत्सव (भारंगम) की औपचारिक  शुरुआत हुई| यह उन्नीसवां भारंगम है| इस आयोजन का सिलसिला 1999  में शुरू हुआ था| कमानी सभागार में हुए उद्घाटन समारोह की मुख्य अतिथि थीं प्रसिद्ध नृत्यागना सोनल मानसिंह| नाट्य निर्देशक फिरोज अब्बास खान, संस्कृति सचिव नरेंद्र कुमार सिन्हा और इजराइल की निर्देशिका बेरजाक शिंडर के साथ वरिष्ठ रंगकर्मी रतन थियम भी मंच पर थे|

लेकिन भारंगम में खाली कुर्सियां दर्शकों का इंतजार करती रहीं लेकिन दर्शक नहीं आए| जबकि चारों ही प्रस्तुतियां कावलाम नारायण पणिक्कर निर्देशित ‘मध्ययमव्यायोग’, अनुरूप राय निर्देशित ‘महाभारत’, कन्हाईलाल निर्देशित ‘पेबेट’ और वेरा बरज़ाक स्नाइडर निर्देशित प्रस्तुति ‘ ए स्ट्रेंजर गेस्ट’ चर्चित और अच्छी प्रस्तुतियां थी|संभवतः भारंगम में दर्शकों को 400 और 300 रुपये मूल्य का टिकट रास नहीं आ रहा और वे विरोध अपनी अनुपस्थिति से दर्ज कर रहे हैं| क्योंकि इसी क्लास की कुर्सियां अधिकतर खाली थीं|

इजराइल की ‘ए स्ट्रेंजर गेस्ट’ शांत और गहरी प्रस्तुति है जो एक खास स्थिति में फंसे परिवार के सदस्यों के व्यक्तिगत और आपसी संबंधों में और उस स्थिति के प्रति उनकी प्रतिक्रिया को दर्ज करती है| मंच की सज्जा किसी मध्य वर्ग के ड्राइंग रूम की है जिसमें दर्शकों की तरफ खिड़कियां हैं जिनके जरिए उनकी स्थिति को दर्शक देख पाता है|  ये खिड़कियां और उन पर पात्रों की गतिविधि से स्पष्ट होता है कि उनके बीच कोई अभिन्न अनुपस्थित है और उसकी अनुपस्थिति नाटक में पात्रों की बेचैनी में दर्ज होती है| एक परिवार में दो बहनें हैं| मां बीमार है|पिता, मां की खबर लेकर आते हैं|

तीनों इस स्थिति में विचलित हैं और वे अपनी स्मृतियों में जाते हैं जो प्रत्येक के लिए अलग-अलग हैं| खाने की टेबल पर उनका व्यवहार, उनकी हताशा और आशंका से उपजा है| मानवीय व्यवहारों सजीव और संवेदनशील ब्यौरा इस प्रस्तुति को इसे खास बना देता है जबकि नाटक में घटनाएं नहीं के बराबर हैं|प्रकाश और अभिनेताओं की गतियों का खेल उनके द्वंद्व को और गाधा बना देता है| नाटक के अंत में सभी पात्र नेपथ्य में चले जाते हैं और एक चीख सुनाई देती है| दर्शक अंधेरे में बैठा स्तब्ध रह जाता है|

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